अलवर: शहर के खुदनपुरी इलाके में बुधवार को एक बेहद दुखद और दर्दनाक वाकया पेश आया। यहां 8 और 5 साल की दो मासूम बहनें खेल-खेल में एक मैकेनिक की दुकान पर खड़ी खराब कार के अंदर जाकर बैठ गईं। कार का दरवाजा बंद होने और उसे वापस न खोल पाने के कारण दोनों बच्चियां अंदर ही फंसी रह गईं और भीषण गर्मी व ऑक्सीजन की कमी से उनका दम घुट गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पीड़ित पिता रमेश, जो पेशे से हेयर सैलून संचालक हैं, ने रोते हुए इस पूरी घटना की जानकारी दी:
पिता गए थे काम पर: रमेश बुधवार सुबह अपनी बड़ी बेटी टीना (8) और छोटी बेटी लक्ष्मी (5) को घर पर छोड़कर अपनी सैलून की दुकान पर काम करने गए थे।
खराब कार बनी काल: सुबह करीब 11:30 बजे दोनों बहनें खेलते हुए पास ही स्थित एक कार रिपेयरिंग सेंटर (गैरेज) पहुंच गईं। वहां मौजूद लोगों ने बच्चियों को वहां से कई बार हटाया भी, लेकिन वे दोबारा घूमकर वहां खड़ी एक लाल रंग की खराब कार के अंदर जाकर बैठ गईं और दरवाजा बंद कर लिया।
यह पूरा वाकया वहां लगे एक सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में भी कैद हुआ है, जिसमें दोनों बच्चियां स्वेच्छा से कार के अंदर जाती दिखाई दे रही हैं।
तलाश करने पर मिलीं बेहोश: रमेश दोपहर करीब 12 बजे जब खाना खाने घर लौटे, तो दोनों बेटियां वहां मौजूद नहीं थीं। घबराए पिता ने जब आसपास उनकी तलाश शुरू की, तो दोनों बच्चियां उसी लाल कार के भीतर बेसुध पड़ी मिलीं।
अस्पताल में तोड़ा दम: रमेश ने आसपास के लोगों की मदद से दोनों को तुरंत कार से बाहर निकाला और जिला अस्पताल लेकर भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों बहनों को मृत घोषित कर दिया।
इस हृदयविदारक घटना ने पीड़ित पिता रमेश को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि महज 4 साल पहले ही रमेश की पत्नी (बच्चियों की मां) की साइलेंट अटैक (हार्ट अटैक) के कारण असमय मौत हो गई थी। पत्नी के जाने के बाद रमेश ही अकेले अपनी दोनों बेटियों को पाल रहे थे, लेकिन इस हादसे ने उनका पूरा परिवार उजाड़ दिया।
मामले की सूचना मिलने पर वैशाली नगर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घटना स्थल का जायजा लिया।
पुलिस की शुरुआती जांच: वैशाली नगर थाना अधिकारी गुरुदत्त सैनी ने बताया कि जिस लाल कार में यह हादसा हुआ, वह लंबे समय से खराब स्थिति में खड़ी थी। कार का इंजन और बैटरी पूरी तरह डेड थी, इसलिए इसमें किसी डिजिटल या ऑटो-लॉक सिस्टम के एक्टिव होने की संभावना नहीं है।
अंदर ही फंस गईं मासूम: शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए प्रतीत होता है कि बच्चियां कार के अंदर तो बैठ गईं, लेकिन तकनीकी खराबी या नासमझी के कारण वे अंदर से कार का मैनुअल लॉक या गेट का हैंडल वापस नहीं खोल सकीं। तेज धूप और बंद गाड़ी के कारण अंदर का तापमान तेजी से बढ़ा और दम घुटने से यह हादसा हो गया। पुलिस फिलहाल सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लेकर मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।