जयपुर: जयपुर के आमेर, जयगढ़ और नाहरगढ़ किलों को आपस में जोड़ने वाले बहुप्रतीक्षित रोपवे प्रोजेक्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अदालत ने 2 फरवरी को सरकार द्वारा दी गई मंजूरी को स्थगित करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
शुक्रवार को जस्टिस समीर जैन की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने प्रोजेक्ट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को निर्धारित की गई है, जिसमें सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
याचिकाकर्ता फर्म 'शिवम प्राइम इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' की ओर से एडवोकेट अभि गोयल और हार्दिक मिश्रा ने कोर्ट में गंभीर तर्क पेश किए:
विज्ञापन का अभाव: वकीलों ने दावा किया कि इस प्रोजेक्ट के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया गया।
एक्ट की अवहेलना: दलील दी गई कि यह प्रोजेक्ट 'राजस्थान पारदर्शिता लोक उपापन अधिनियम (RTPP)-2012' के दायरे में आता है, लेकिन टेंडर आवंटन में इसके प्रावधानों की खुली अनदेखी की गई।
कोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा प्रोजेक्ट की लागत को लेकर हुई। याचिकाकर्ता ने बताया:
कम लागत का प्रस्ताव: याचिकाकर्ता फर्म ने करीब 80 करोड़ रुपए में रोपवे बनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसमें वन भूमि और पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंच रहा था।
महंगा टेंडर स्वीकृत: इसके बावजूद, सरकार ने अज्ञात कारणों से 350 करोड़ रुपए की लागत बताने वाली दूसरी फर्म (जीआर इंफ्रा) को 2 फरवरी 2026 को शुरुआती मंजूरी दे दी।
याचिका में यह भी कहा गया कि जिस फर्म को काम दिया गया है, उसके प्रोजेक्ट डिजाइन से वन क्षेत्र का गंभीर दोहन होगा और बड़ी संख्या में पेड़ों को नुकसान पहुंचेगा। याचिकाकर्ता का तर्क है कि उनके प्रस्ताव में वनस्पतियों को 'शून्य नुकसान' का दावा किया गया था, फिर भी उसे खारिज कर दिया गया।
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए रोपवे बनाने की घोषणा की थी। जयपुर के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आमेर, नाहरगढ़ और जयगढ़ के बीच इस रोपवे को सबसे प्रमुख प्रोजेक्ट माना जा रहा था। बजट आवंटन के बाद इसका काम शुरू होना था, लेकिन अब मामला कानूनी पेचीदगियों में फंस गया है।