एसीबी के अनुसार, परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी कंपनी सोलर रिधम एनर्जी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के एक ग्राहक के घर पर 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम स्थापित किया जाना था। इसके लिए बिजली कनेक्शन की लोड क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता थी। आरोप है कि इस कार्य को करने के बदले जूनियर इंजीनियर मनोज कुमार ने रिश्वत की मांग की।
शिकायत के मुताबिक आरोपी इंजीनियर ने 14 अगस्त को लोड बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी करने के बदले 5 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। बाद में बातचीत के दौरान यह रकम 3 से 4 हजार रुपए के बीच तय हुई।
परिवादी ने इसकी शिकायत एसीबी को दी। शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई, जिसके बाद एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
एसीबी जयपुर रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के निर्देशन में एसीबी चौकी जयपुर नगर चतुर्थ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस निरीक्षक रामजी लाल और उनकी टीम ने रविवार 24 अगस्त को कार्रवाई करते हुए आरोपी को परिवादी से 3 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि मौके से बरामद कर ली गई और आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
एसीबी के डीआईजी ओमप्रकाश मीणा ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले में अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। ऐसे में सोलर सिस्टम लगाने से जुड़े कार्यों में रिश्वतखोरी की शिकायत सामने आने से विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
एसीबी की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस तरह की रिश्वतखोरी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी या यह आरोपी की व्यक्तिगत भूमिका तक सीमित थी।