Rajasthan

90 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़े 3 संविदा नर्सिंगकर्मी; 19 हजार पदों पर मेरिट-बोनस से भर्ती की मांग

जयपुर: राजधानी के जयपुरिया अस्पताल परिसर में शुक्रवार तड़के संविदा पर कार्यरत एक महिला समेत तीन नर्सिंगकर्मी 90 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ गए। बारिश के बीच तीनों कर्मचारी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग को लेकर टंकी पर डटे हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची और अनहोनी की आशंका को देखते हुए टंकी के नीचे सुरक्षा जाल लगाया गया है।

 

तड़के 3:40 बजे चढ़े टंकी पर, समर्थन में पहुंचे सैकड़ों कर्मचारी

टंकी पर चढ़े कर्मचारियों की पहचान विमल शर्मा (32), रॉबिन शर्मा (28) और संजीता चौधरी (30) के रूप में हुई है:

  • सुबह-सुबह कदम: तीनों संविदाकर्मी शुक्रवार तड़के करीब 3:40 बजे जयपुरिया हॉस्पिटल परिसर में स्थित पानी की टंकी पर चढ़े थे।

  • भारी बारिश में भी डटे: जयपुर में हो रही बारिश के बावजूद तीनों अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

  • एकजुट हुए संविदाकर्मी: दोपहर में घटना की खबर फैलते ही प्रदेशभर से बड़ी संख्या में संविदा नर्सिंगकर्मी उनके समर्थन में जयपुरिया अस्पताल के पीछे एकत्र हो गए।

 

क्या हैं मुख्य मांगें?

प्रदर्शनकारी नर्सिंगकर्मियों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर शासन और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला है:

  • 19 हजार पदों पर भर्ती: संविदाकर्मियों की मांग है कि राज्य सरकार नर्सिंग ऑफिसर के 12,000 और एएनएम (ANM) के 7,000 पदों पर जल्द से जल्द नियमित भर्ती निकाले।

  • मेरिट + बोनस अंक प्रणाली: वे मांग कर रहे हैं कि इस भर्ती प्रक्रिया को लिखित परीक्षा के बजाय पुराने अनुभवों के आधार पर 'मेरिट और बोनस अंक' जोड़कर पूरा किया जाए।

 

"2 साल से सिर्फ आश्वासन मिला, भविष्य अंधकार में दिख रहा"

टंकी पर चढ़े और नीचे प्रदर्शन कर रहे नर्सिंगकर्मियों ने सरकार पर अनदेखी के आरोप लगाए हैं:

  • सुनवाई न होने का आरोप: कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले दो वर्षों से मंत्रियों और आला अधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचा रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला है।

  • कम वेतन पर शोषण: प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संविदा कर्मचारी बरसों से नियमित कर्मचारियों की तरह सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम वेतन दिया जा रहा है।

  • मानसिक व आर्थिक तनाव: वर्षों की सेवा के बावजूद स्थायी नियुक्ति न मिलने से कर्मचारी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

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