उदयपुर: राजस्थान में दवा व्यवसायियों ने कॉरपोरेट कंपनियों और अवैध ई-फार्मेसी के खिलाफ एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल रखी। इस बंद का राज्य के अलग-अलग जिलों में मिला-जुला असर देखने को मिला। जहां मुख्य बाजारों के मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह बंद रहे, वहीं राहत की बात यह रही कि सरकारी अस्पतालों के भीतर संचालित दवा दुकानें खुली रहीं।
हड़ताल के दौरान लेक सिटी उदयपुर में माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब बंद समर्थकों और एक मेडिकल स्टोर संचालक के बीच विवाद खड़ा हो गया।
दुकान खुली रखने पर आपत्ति: एसोसिएशन के पदाधिकारी जब बाजार में दुकानें बंद कराने निकले, तो एक संचालक ने अपनी दुकान बंद करने से इनकार कर दिया।
बीच-बचाव से शांत हुआ मामला: दोनों पक्षों के बीच देखते ही देखते तीखी बहसबाजी शुरू हो गई। मौके पर मौजूद अन्य व्यापारियों और आम लोगों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया, जिसके बाद वह दुकान भी बंद कर दी गई।
प्रदेश के बड़े शहरों में दवा कारोबारियों ने इस हड़ताल को अपना पूरा समर्थन दिया:
अजमेर: जिले में करीब 1200 मेडिकल स्टोर्स के शटर पूरे दिन गिरे रहे, जिससे निजी क्लीनिकों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा।
जयपुर: राजधानी के सबसे बड़े दवा बाजार 'फिल्म कॉलोनी' की सभी 500 से अधिक थोक और खुदरा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। हालांकि, सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के सामने स्थित अधिकांश रिटेल मेडिकल स्टोर मरीजों की सहूलियत के लिए खुले नजर आए।
जोधपुर: सूर्यनगरी में भी निजी मेडिकल स्टोर बंद रहे। लेकिन राहत की बात यह रही कि मथुरादास माथुर और महात्मा गांधी जैसे सरकारी अस्पतालों के भीतर स्थित दवा काउंटर और 'प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र' के आउटलेट खुले रहे, जिससे गंभीर मरीजों को दवाइयां मिलती रहीं। इसके अलावा, जिन ऑनलाइन कंपनियों के विरोध में यह हड़ताल थी, उनकी सेवाएं (Online Delivery) चालू रहीं।
केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर व्यापार कर रही हैं, जिससे खुदरा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में है। आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
अवैध ई-फार्मेसी पर रोक: बिना उचित सत्यापन के चल रहे अवैध ऑनलाइन दवा पोर्टल्स और ई-फार्मेसी के संचालन पर तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था: कॉरपोरेट कंपनियों के एकाधिकार को समाप्त कर छोटे दवा दुकानदारों के लिए एक निष्पक्ष और संतुलित व्यापार प्रणाली (Fair Trade Policy) सुनिश्चित की जाए।
जनस्वास्थ्य की सुरक्षा: ऑनलाइन दवाओं के दुरुपयोग (Misuse) को रोकने के लिए कड़े नियामकीय और रेगुलेटरी प्रावधान लागू किए जाएं।
अधिसूचनाएं वापस लेने की मांग: दवा व्यापार को प्रभावित करने वाली केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं—जीएसआर 817 (ई) एवं जीएसआर 220 (ई) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ई-फार्मेसी पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना जाएगा।