Rajasthan

भीलवाड़ा में यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा का विरोध: जनता ने उठाए विकास कार्यों के मुद्दे, मंत्री बोले- सरकार समय पर कराएगी निकाय चुनाव

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा में शुक्रवार को शहरी विकास एवं आवासन (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। मंत्री शहर में आयोजित शहरी सेवा कैंप के फॉलोअप शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान नागरिकों ने यूआईटी (शहरी सुधार न्यास) में लंबे समय से सचिव का पद खाली होने और विकास कार्य ठप होने का मुद्दा उठाया। लोगों ने मंत्री के सामने नाराजगी जताते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों से यूआईटी में सचिव नहीं होने के कारण आम जनता के काम अटके हुए हैं और समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है।

लोगों की शिकायतों के जवाब में मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा, "अरे भाया, थांका राज में 12-12 महीना कोनी लागता।" मंत्री की इस टिप्पणी से मौके पर मौजूद लोग और अधिक नाराज हो गए। नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पांच दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे जयपुर स्थित मंत्री के सरकारी आवास के बाहर धरना देंगे।

विरोध के बीच मंत्री ने लोगों की समस्याएं भी सुनीं और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की बात कही। हालांकि, मंत्री की टिप्पणी को लेकर मौके पर काफी देर तक बहस का माहौल बना रहा।

निकाय चुनाव समय पर कराने का भरोसा

बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि राज्य सरकार राजस्थान में निकाय चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और समय पर कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव प्रक्रिया को लेकर सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर रही है।

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर दिए हैं। सरकार की ओर से जो भी प्रक्रियाएं पूरी की जानी थीं, उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया है।

उन्होंने कहा कि नगर निकायों की सीमा वृद्धि, पुनर्गठन और वार्डों के नए सिरे से परिसीमन का कार्य सरकार ने वर्ष 2026 की शुरुआत तक पूरा कर लिया था। इसके अलावा वार्ड पुनर्गठन से जुड़े एक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला भी राज्य सरकार के पक्ष में आया है, जिससे चुनाव कराने की प्रक्रिया को और मजबूती मिली है।

'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी

यूडीएच मंत्री ने कहा कि निकाय चुनावों में पिछड़े वर्ग (ओबीसी) को राजनीतिक आरक्षण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2022 के ऐतिहासिक फैसले का पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

मंत्री के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत आयोग को वार्डवार, निकायवार, पंचायतवार, पंचायत समितिवार और जिला परिषदवार ओबीसी आबादी का सटीक आंकड़ा तैयार कर सरकार को सौंपना होता है। इसके बाद सरकार इन आंकड़ों का परीक्षण कर राजनीतिक आरक्षण से संबंधित अधिसूचना जारी करती है। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से आवश्यक है और राज्य सरकार इसका पालन कर रही है।

सरकार ने पूरी की आवश्यक तैयारियां

झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि सरकार चुनाव टालने के पक्ष में नहीं है, बल्कि सभी संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए निकाय चुनाव समय पर कराना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन, सीमा विस्तार और प्रशासनिक पुनर्गठन जैसे अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और अब चुनाव कराने में किसी प्रकार की बाधा नहीं रहनी चाहिए।

मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ हों और किसी भी वर्ग के अधिकारों का उल्लंघन न हो। इसी उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

जनता की नाराजगी बनी बड़ी चुनौती

हालांकि, मंत्री के दौरे के दौरान सामने आई जनता की नाराजगी ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूआईटी में लंबे समय से सचिव का पद खाली रहने, विकास कार्यों में देरी और आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होने को लेकर लोगों ने खुलकर विरोध दर्ज कराया।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्धारित समय में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे जयपुर पहुंचकर मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे। ऐसे में सरकार के लिए एक ओर जहां निकाय चुनावों की तैयारियां चुनौती बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था और जनता के असंतोष को दूर करना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।