नामांकन के अंतिम दिन सुबह से दोपहर तक कांग्रेस पदाधिकारी लगातार डैमेज कंट्रोल में जुटे रहे। एक के बाद एक सामने आई परिस्थितियों के बीच पार्टी को पैनल में शामिल दूसरे दावेदारों को आगे लाकर आनन-फानन में नामांकन करवाना पड़ा। कुछ वार्डों में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी ही पीछे हट गए तो कुछ जगह टिकट से नाराज दावेदारों ने बगावत का रास्ता अपनाते हुए निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया।
वार्ड 43 में कांग्रेस ने राजकुमार गमेती को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। लेकिन नामांकन के आखिरी दिन अचानक उन्होंने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। राजकुमार नामांकन दाखिल करने के लिए पहुंचे ही नहीं। इससे कांग्रेस नेताओं के सामने अंतिम समय में प्रत्याशी बदलने की चुनौती खड़ी हो गई।
पार्टी ने तत्काल पैनल में शामिल दूसरे दावेदार शंकरलाल गमेती को आगे किया। कांग्रेस ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया और उनका नामांकन दाखिल करवाया। आखिरी समय में हुए इस बदलाव से वार्ड में कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चाएं तेज हो गईं।
वार्ड 55 में कांग्रेस ने आशा सैनी को अपना प्रत्याशी बनाया था। वहीं उनके भाई देवेंद्र माली को वार्ड 54 से टिकट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन जब देवेंद्र को टिकट नहीं मिला तो आशा नाराज हो गईं।
नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस पदाधिकारी आशा सैनी के पहुंचने का इंतजार करते रहे। करीब 11.30 बजे तक जब वह नामांकन स्थल नहीं पहुंचीं तो पार्टी नेताओं ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। बातचीत में आशा ने भाई को टिकट नहीं मिलने पर नाराजगी जताई और कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल नहीं करने की बात कही।
मामला बिगड़ता देख पार्टी ने पैनल में शामिल दूसरे नंबर की प्रत्याशी जेसीका राव से संपर्क किया। कांग्रेस ने उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाया और अंतिम समय में उनका नामांकन दाखिल करवाया।
लेकिन इस घटनाक्रम का दूसरा पहलू भी कांग्रेस के लिए चुनौती बन गया। टिकट से नाराज देवेंद्र माली ने पार्टी के फैसले के खिलाफ बगावत कर दी और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया। यानी एक तरफ कांग्रेस को अपना अधिकृत प्रत्याशी बदलना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ टिकट से वंचित दावेदार ने निर्दलीय मैदान में उतरकर पार्टी के लिए मुकाबला मुश्किल कर दिया।
वार्ड 24 में भी कांग्रेस के सामने नामांकन के अंतिम दिन ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई। पार्टी ने सुन्दरलाल वसीटा को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। दूसरी ओर कुमावतपुरा क्षेत्र से कांग्रेस कार्यकर्ता ललित कुमावत की बेटी दीपिका कुमावत भी टिकट की दावेदार थीं।
टिकट नहीं मिलने के बाद दीपिका की नाराजगी बढ़ गई। सोमवार को वह कांग्रेस से अलग होकर निर्दलीय नामांकन दाखिल करने कलक्ट्रेट पहुंच गईं। कांग्रेस पदाधिकारियों ने उन्हें मनाने की कोशिश की और काफी देर तक बातचीत चली, लेकिन दीपिका अपनी दावेदारी पर कायम रहीं।
इसी बीच वार्ड 24 में अचानक घटनाक्रम बदल गया। कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी सुन्दरलाल वसीटा ने दीपिका कुमावत के लिए रास्ता छोड़ने पर सहमति जताई। उन्होंने दीपिका को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाने के लिए अपनी सहमति दी। पार्टी ने वसीटा से इस संबंध में लिखित सहमति ली।
इसके बाद कांग्रेस ने दीपिका कुमावत को अधिकृत प्रत्याशी बनाकर उनका नामांकन दाखिल करवाया। इस तरह नामांकन के अंतिम समय में कांग्रेस ने वार्ड 24 में भी अपना प्रत्याशी बदल दिया।
नगर निगम चुनाव के नामांकन के आखिरी दिन कांग्रेस में सामने आए इन घटनाक्रमों ने टिकट वितरण के बाद की अंदरूनी नाराजगी को उजागर कर दिया। वार्ड 24 में बगावत की स्थिति बनने के बाद अधिकृत प्रत्याशी के पीछे हटने से मामला सुलझा, जबकि वार्ड 43 में प्रत्याशी के चुनाव लड़ने से इनकार के बाद पार्टी को नया उम्मीदवार उतारना पड़ा।
वहीं वार्ड 55 में भाई-बहन की नाराजगी ने कांग्रेस की मुश्किल बढ़ा दी। पार्टी ने भले ही तत्काल वैकल्पिक प्रत्याशी उतारकर नामांकन दाखिल करा दिया, लेकिन टिकट से नाराज देवेंद्र माली के निर्दलीय मैदान में उतरने से कांग्रेस के सामने भीतरघात और वोटों के बंटवारे की चुनौती खड़ी हो गई है।
नामांकन के आखिरी दिन तक चले इस सियासी घटनाक्रम से साफ है कि उदयपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के लिए केवल विपक्षी दल ही चुनौती नहीं हैं, बल्कि टिकट वितरण के बाद नाराज दावेदारों को साधना भी बड़ी चुनौती बन गया है। अब नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों का असर चुनावी समीकरणों पर कितना पड़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।