गहलोत के मुताबिक, योजना को NFSA परिवारों तक सीमित करने से करीब 90 हजार छात्राएं, यानी लगभग 28 प्रतिशत बेटियां, निशुल्क साइकिल योजना के लाभ से बाहर हो जाएंगी। उन्होंने दावा किया कि इसके साथ योजना के बजट में भी करीब 40 करोड़ रुपये की कटौती की गई है।
गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कांग्रेस सरकार के समय बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू और विस्तारित की गई थीं। उनके मुताबिक, सरकारी संस्थानों में LKG से PG तक बेटियों की पढ़ाई निशुल्क की गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान स्कूटी पाने वाली छात्राओं की संख्या 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार की गई थी। साथ ही पांच वर्षों में 132 बालिका कॉलेज खोले गए।
गहलोत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने के बाद इन योजनाओं में कटौती शुरू कर दी है।
गहलोत ने इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार, जिसका नाम अब पद्माक्षी पुरस्कार किए जाने की बात कही गई है, में भी बदलाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 12वीं कक्षा की मेधावी छात्राओं को पहले मिलने वाली एक लाख रुपये की राशि और स्कूटी की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। उनके अनुसार अब राशि घटाकर 75 हजार रुपये कर दी गई है और स्कूटी का लाभ हटा दिया गया है।
अशोक गहलोत ने शिक्षक सम्मान की संख्या में कमी किए जाने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि पहले 1,374 शिक्षकों को सम्मानित किया जाता था, जिसे घटाकर 189 किए जाने की बात सामने आई है।
गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि आखिर बेटियों की शिक्षा और शिक्षकों के सम्मान से सरकार को इतनी परेशानी क्यों है। उन्होंने कहा कि जो योजनाएं बेटियों को स्कूल तक पहुंचाने और शिक्षा जारी रखने में मदद करती हैं, उनमें कटौती नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने बेटियों की शिक्षा के लिए अवसर बढ़ाए थे, जबकि भाजपा सरकार उन्हीं योजनाओं को सीमित कर रही है।
फ्री साइकिल योजना में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को स्कूल तक पहुंचाने में साइकिल योजना की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में पात्रता का दायरा सीमित करने से बड़ी संख्या में छात्राओं को नुकसान हो सकता है।
वहीं, इस पूरे मामले में सरकार का पक्ष और योजना में बदलाव के विस्तृत आधार सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल फ्री साइकिल योजना में बदलाव राजस्थान में एक नया राजनीतिक मुद्दा बन गया है।