संयम लोढ़ा का कहना है कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को नवंबर तक पंचायतीराज चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने 15 अगस्त तक आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सरकार ने तय समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने के बजाय इसे स्थगित कर दिया।
राजस्थान में 309 शहरी निकायों के प्रमुखों और उनके वार्डों में आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही 41 जिला प्रमुखों के पदों की लॉटरी भी निकाय प्रमुखों के साथ पूरी कर ली गई थी।
वहीं प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और वार्ड पंच के पदों एवं वार्डों के आरक्षण की लॉटरी 17 अगस्त को प्रस्तावित थी। लेकिन सरकार ने इससे एक दिन पहले 16 अगस्त की शाम को ही लॉटरी प्रक्रिया स्थगित करने का फैसला कर लिया।
अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के वार्डों की आरक्षण लॉटरी 17 सितंबर को होगी। वहीं सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षण लॉटरी 18 सितंबर को निकाली जाएगी।
संयम लोढ़ा ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाईकोर्ट के सामने अधिकारियों ने ही चुनाव प्रक्रिया का कार्यक्रम रखा था। उन्होंने कहा कि जब हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया, उस समय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के आधार पर अधिकारियों ने अदालत को बताया था कि 15 अगस्त या उससे पहले आरक्षण लॉटरी की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
लोढ़ा का आरोप है कि अब उसी प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया गया है, जो हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के दायरे में आता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अवमानना का कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है और यदि तत्काल लॉटरी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जाएगी।
संयम लोढ़ा की ओर से दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव नवंबर तक कराने के निर्देश दिए थे। अदालत के आदेश के बाद सरकार और निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अलग-अलग चरणों में आरक्षण की लॉटरी निकालने की प्रक्रिया शुरू की थी।
शहरी निकायों और जिला प्रमुखों से जुड़ी लॉटरी पूरी होने के बाद पंचायतीराज संस्थाओं के पदों के लिए लॉटरी होनी थी। लेकिन प्रक्रिया स्थगित होने के बाद अब विपक्ष सरकार पर हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा है।
कांग्रेस नेता की ओर से कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद अब सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर नजर रहेगी। यदि तय समय में लॉटरी प्रक्रिया को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो संयम लोढ़ा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
वहीं सरकार की ओर से लॉटरी स्थगित करने के पीछे प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कारण बताए जा सकते हैं। फिलहाल संशोधित कार्यक्रम के तहत सितंबर में आरक्षण लॉटरी कराने की तैयारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।