RCDF के मुताबिक राजस्थान में रोजाना करीब 1000 लाख लीटर यानी 10 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है। लेकिन संगठित क्षेत्र की प्रमुख संस्था RCDF प्रतिदिन केवल 40 से 45 लाख लीटर दूध का ही संकलन और प्रसंस्करण करती है। ऐसे में प्रदेश में उत्पादित और बाजार में पहुंचने वाले बड़ी मात्रा में दूध की गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट में पेश अतिरिक्त अनुपालन हलफनामे में RCDF ने प्रदेश के डेयरी सेक्टर से जुड़े आंकड़े सामने रखे हैं।
कुल दैनिक उत्पादन: करीब 1000 लाख लीटर दूध।
घरेलू खपत: करीब 500 लाख लीटर दूध पशुपालक और उनके परिवार ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में खुद इस्तेमाल कर लेते हैं।
मार्केटेबल सरप्लस: करीब 500 लाख लीटर दूध बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होता है।
संगठित क्षेत्र: इस सरप्लस में करीब 100 लाख लीटर दूध संगठित क्षेत्र तक पहुंचता है।
RCDF का हिस्सा: RCDF यानी सरस करीब 40 से 45 लाख लीटर दूध का संकलन करता है।
असंगठित क्षेत्र: करीब 400 लाख लीटर दूध स्थानीय दूधियों, बिचौलियों और असंगठित विक्रेताओं के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
इन आंकड़ों के मुताबिक बाजार में आने वाले करीब 500 लाख लीटर दूध में से लगभग 400 लाख लीटर दूध असंगठित क्षेत्र के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। यही हिस्सा खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता की प्रभावी निगरानी को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
RCDF का कहना है कि वह एक सरकारी और संगठित डेयरी संस्था के रूप में सीमित मात्रा में दूध का संकलन, प्रसंस्करण और गुणवत्ता नियंत्रण करता है। ऐसे में बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई संगठित डेयरी नेटवर्क के बाहर होती है।
दूध और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में स्वप्रेरित संज्ञान लिया है।
अब सवाल यह है कि प्रदेश में प्रतिदिन बाजार में पहुंचने वाले दूध की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हो रही है और असंगठित क्षेत्र के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच रहे दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी तंत्र कितना प्रभावी है।
राजस्थान में दूध का इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है। ऐसे में दूध की गुणवत्ता से जुड़ा यह आंकड़ा सीधे तौर पर करोड़ों उपभोक्ताओं की चिंता से जुड़ता है।
हाईकोर्ट में RCDF के हलफनामे के बाद अब प्रदेश के खाद्य सुरक्षा तंत्र, दूध की जांच व्यवस्था और असंगठित डेयरी कारोबार पर निगरानी को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई में सरकार और संबंधित विभागों से इस व्यवस्था को लेकर जवाब और दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।