याचिका में कहा गया है कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रोशन मीणा के स्थानांतरण के बाद से नागौर में एसपी का पद रिक्त है। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। RLP का आरोप है कि 19 अगस्त 2026 को राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने नियमित पुलिस अधीक्षक नियुक्त करने के बजाय एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नागौर एसपी का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया।
पार्टी ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान जिले के पुलिस अधीक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ सभी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होती है।
RLP ने जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट से नागौर के रिक्त एसपी पद को तत्काल नियमित नियुक्ति से भरने, 19 अगस्त को जारी अतिरिक्त कार्यभार संबंधी आदेश को निरस्त करने और चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी दलों एवं प्रत्याशियों के लिए समान, स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में RLP ने आशंका जताई है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते चुनाव के दौरान पुलिस कार्रवाई का दुरुपयोग हो सकता है। पार्टी का कहना है कि यदि पुलिस प्रशासन पर राजनीतिक दबाव रहा तो कार्यकर्ताओं और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई के जरिए चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बनी रह सकती है।
RLP का कहना है कि यह याचिका किसी व्यक्ति विशेष के हित में नहीं, बल्कि मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और नगर निकाय एवं पंचायतीराज चुनावों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में कराने के उद्देश्य से दायर की गई है। अब इस मामले में हाईकोर्ट के रुख पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजरें टिकी हैं।