Rajasthan

राजसमंद: गन्ने के खेत में मिले लेपर्ड के दो मासूम शावक, रात को बच्चों को ढूंढते हुए आई मां और ले गई साथ

 

राजसमंद: वन्यजीवों और इंसानों के बीच की दूरियां कई बार चौंकाने वाले दृश्य सामने लाती हैं। ऐसा ही कुछ भावा गांव में हुआ, जहां किसान के खेत में तेंदुए के दो बच्चे मिले। गनीमत रही कि शावकों की मां (मादा लेपर्ड) आसपास नहीं थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। वन्यजीव संरक्षण की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

 

गुर्राने की आवाज से खुला राज, गोद में उठाने लगे लोग

भावा गांव के किसान नारायण गुर्जर का गन्ने का खेत है। गुरुवार दोपहर जब वे खेत में काम करने पहुंचे, तो उन्हें झाड़ियों के पीछे से हल्की गुर्राने की आवाज सुनाई दी।

  • मच गई भीड़: कौतूहलवश जब नारायण ने पास जाकर देखा तो वहां लेपर्ड के दो छोटे शावक बैठे थे। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव में फैल गई और खेत में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

  • सेल्फी और लाड-प्यार: शावकों को छोटा और मासूम देखकर वहां मौजूद कुछ युवक और बच्चे उन्हें हाथों में लेकर सहलाने लगे। एक युवक ने तो सुरक्षा की परवाह किए बिना शावक को अपनी गोद में उठा लिया, जिसका वीडियो भी सामने आया है।

 

खेत मालिक की सूझबूझ और वन विभाग का एक्शन

खेत मालिक नारायण गुर्जर ने वन्यजीवों की सुरक्षा को भांपते हुए भीड़ को पीछे हटाया और दोनों शावकों को एक सुरक्षित जगह पर ढक कर रख दिया। इसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी।

  • नर्सरी में शिफ्टिंग: डीएफओ (DFO) रामानंद भाकर ने बताया कि सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। दोनों शावकों को ग्रामीणों से दूर कर सुरक्षित रूप से वन विभाग की 'बिनोल नर्सरी' में शिफ्ट किया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उनकी सेहत की जांच की।

 

'मदर लव': रात को शावकों को लेने पहुंची मादा लेपर्ड

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इंसानी गंध आ जाने के बाद कई बार वन्यजीव अपने बच्चों को छोड़ देते हैं, लेकिन विभाग ने एक वैज्ञानिक तरीका अपनाया।

  • दोबारा खेत में छोड़ा: डीएफओ भाकर ने बताया कि शावकों को उनकी मां से मिलाने के लिए गुरुवार रात को टीम दोबारा उन्हें उसी गन्ने के खेत में छोड़कर आई, जहां वे मिले थे। वनकर्मियों ने दूर से ही इस पर नजर रखी।

  • सुबह खाली मिला स्थान: शुक्रवार सुबह जब वन विभाग की टीम वापस मौके पर मुआयना करने पहुंची, तो दोनों शावक वहां मौजूद नहीं थे। पदचिह्नों और परिस्थितियों से साफ है कि गुरुवार देर रात ही मादा लेपर्ड अपने बच्चों को ढूंढते हुए वहां आई और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गई।

 

वन विभाग की चेतावनी: जंगली जानवरों के बच्चों को न छुएं

इस सफल रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी जारी की है। डीएफओ ने अपील की है कि खेतों में पैंथर या लेपर्ड के बच्चे दिखने पर उन्हें छूने या उठाने की गलती कतई न करें। अगर ऐसे समय में मादा लेपर्ड वहां आ जाती, तो वह बच्चों की सुरक्षा के लिए इंसानों पर जानलेवा हमला कर सकती थी।

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