डोटासरा ने आरोप लगाया कि आरक्षण प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी महज प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि जानबूझकर की गई बेईमानी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पूरे मामले के कानूनी पहलुओं पर विचार कर रही है और जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
डोटासरा ने सवाल उठाते हुए कहा कि नगर निकायों में OBC के लिए निर्धारित आरक्षण कम कैसे हो गया। उन्होंने SC-ST आरक्षण की लॉटरी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई जगह आरक्षण की गणना में गड़बड़ी सामने आई।
उनका आरोप है कि कुछ मामलों में SC की जनसंख्या के आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और OBC को लेकर भी आंकड़ों में विसंगतियां सामने आईं। डोटासरा के मुताबिक, जब कांग्रेस के लोगों ने इन गड़बड़ियों को पकड़ा तो कुछ जगह लॉटरी दोबारा निकालनी पड़ी।
उन्होंने कहा कि इसे गलती या गफलत कहकर जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता। कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच भी उठाएगी।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने भरतपुर में आरक्षण की लॉटरी दोबारा निकाले जाने को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि यदि पहली लॉटरी सही थी तो उसे निरस्त कर दोबारा प्रक्रिया कराने की जरूरत क्यों पड़ी।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं के आरक्षण को एक साथ जोड़कर 309 निकायों में प्रक्रिया की गई। उनका कहना है कि इससे बड़ी नगर निकायों में SC-ST वर्ग को अपेक्षित आरक्षण का लाभ नहीं मिला, जबकि कुछ छोटी निकायों में आरक्षण का प्रावधान किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि SC-ST और OBC वर्ग के साथ अन्याय हुआ है। डोटासरा ने साफ कहा कि कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक स्तर के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है। आरक्षण प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो पार्टी अदालत का रुख करेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं है, बल्कि आरक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। उन्होंने सरकार से पूरी प्रक्रिया और आरक्षण के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने निकाय चुनावों में देरी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि चुनाव टलने की वजह से केंद्र और राज्य से निकायों को मिलने वाली कुछ राशि का इस्तेमाल समय पर नहीं हो पाया और फंड लैप्स होने की स्थिति बनी।
डोटासरा ने पंचायत राज चुनाव से जुड़े करीब 1900 करोड़ रुपये के TFC और SFC फंड के लैप्स होने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि सरकार को चुनाव समय पर कराने और स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
डोटासरा ने सरकार पर शिक्षक तबादलों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तबादलों में पैसे के लेनदेन की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनके मुताबिक कुछ शिक्षकों के चार-चार बार तबादले किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि तबादलों पर रोक होने के बावजूद शिक्षा विभाग में अलग-अलग स्तर पर काम चल रहा है। डोटासरा ने सरकार से पूरी तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की।
नगर निकायों के अधिकारियों को APO किए जाने पर भी डोटासरा ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों को जानबूझकर APO रखा जा रहा है और चुनाव के बाद उन्हें फिर उन्हीं जिलों में पदस्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
डोटासरा ने कहा कि सरकार को अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर को लेकर स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल न उठें।
आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनावों में टिकट वितरण को लेकर भी डोटासरा ने कांग्रेस की रणनीति बताई। उन्होंने कहा कि पार्टी का फोकस युवा चेहरों पर रहेगा। उनकी कोशिश होगी कि करीब 60 प्रतिशत तक टिकट युवाओं को दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि टिकट देने में जीतने की क्षमता, संगठन में सक्रियता और स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे निर्दलीय जनप्रतिनिधियों पर भी विचार किया जा सकता है, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस के साथ काम किया है।
हालांकि डोटासरा ने स्पष्ट किया कि भाजपा के साथ काम कर चुके लोगों को टिकट देने के मामले में कांग्रेस सावधानी बरतेगी। उन्होंने कहा कि आगामी निकाय और पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस संगठन की ताकत के साथ मैदान में उतरेगी और सरकार के खिलाफ बने मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी।