वहीं, नरेश मीणा के अधिवक्ता फतेहराम मीणा ने कहा कि एससी/एसटी कोर्ट से रेगुलर बेल खारिज होने के बाद अब हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की जाएगी। ऐसे में नरेश मीणा की कानूनी लड़ाई अब हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी।
यह मामला नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुए विवाद से जुड़ा है। समरावता गांव में मतदान बहिष्कार के दौरान तत्कालीन उनियारा एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने का आरोप नरेश मीणा पर लगा था। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी और पुलिस ने नरेश मीणा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था।
नरेश मीणा को इस मामले में पहले राजस्थान हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिल चुकी थी। हालांकि बाद में जमानत की शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आया। नगरफोर्ट थाना पुलिस की ओर से पेश की गई अर्जी पर सुनवाई के बाद टोंक की एससी/एसटी कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को नरेश मीणा की जमानत रद्द कर दी थी।
जमानत रद्द होने के बाद नरेश मीणा की ओर से दोबारा नियमित जमानत के लिए एससी/एसटी कोर्ट में आवेदन किया गया था। मंगलवार को अदालत ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया।
अब नरेश मीणा के वकील ने हाईकोर्ट जाने की बात कही है। ऐसे में हाईकोर्ट में दायर होने वाली याचिका पर अगली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि उन्हें इस मामले में दोबारा जमानत दी जाती है या नहीं।
पूरा मामला 13 नवंबर 2024 का है। उस समय देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा था। समरावता गांव के ग्रामीणों ने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था।
निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। इसी दौरान मतदान को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि नरेश मीणा ने तीन लोगों के जबरन मतदान करने का विरोध किया।
इसी दौरान उनकी तत्कालीन उनियारा एसडीएम अमित चौधरी से बहस हो गई। आरोप है कि नरेश मीणा ने एसडीएम को थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया था।
घटना के अगले दिन यानी 14 नवंबर 2024 को पुलिस ने नरेश मीणा को धरना स्थल से गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद 15 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया।
एसडीएम को थप्पड़ मारने की घटना के बाद समरावता और आसपास के इलाके में तनाव बढ़ गया था। इस मामले में पुलिस ने 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया था। बाद में ज्यादातर आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई, लेकिन नरेश मीणा लंबे समय तक जेल में रहे।
करीब नौ महीने बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी। इसके बाद वह जेल से बाहर आए थे।
नरेश मीणा की मुश्किलें इसके बाद भी खत्म नहीं हुईं। 25 जुलाई 2025 को झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल की इमारत का एक कमरा गिर गया था। हादसे में सात बच्चों की मौत हो गई थी।
इस घटना के बाद नरेश मीणा एसआरजी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद नगरफोर्ट थाना पुलिस की ओर से कोर्ट में आवेदन दिया गया।
पुलिस की ओर से जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिए जाने के बाद टोंक की एससी/एसटी कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को नरेश मीणा की पहले मिली जमानत रद्द कर दी थी।
एससी/एसटी कोर्ट से मंगलवार को रेगुलर जमानत याचिका खारिज होने के बाद नरेश मीणा के वकील ने हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है। अधिवक्ता फतेहराम मीणा के मुताबिक अब हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की जाएगी।
वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत में जमानत का विरोध किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने नरेश मीणा की रेगुलर बेल अर्जी खारिज कर दी।
अब इस मामले में सभी की नजरें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेंगी। हाईकोर्ट में नरेश मीणा की ओर से निचली अदालत के फैसले के बाद जमानत की मांग की जाएगी। फिलहाल एससी/एसटी कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नरेश मीणा के लिए कानूनी लड़ाई का अगला पड़ाव हाईकोर्ट होगा।