राजस्थान हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारी और एसीबी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को अवमानना का दोषी माना है. उन्हें व्हाट्सएप पर नोटिस भेजकर आरोपी को गिरफ्तार करने के मामले में 6 अप्रैल को कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.
जस्टिस प्रवीर भटनागर की अदालत ने यह आदेश सोमवार को रवि मीणा की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. कोर्ट ने पुलिस की इस तरह की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए व्हाट्सएप पर नोटिस भेजने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करने को अवैध ठहराया.
पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ वर्तमान में सिरोही में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर कार्यरत हैं.
कोर्ट ने कहा - बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं करना चाहिए
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि नोटिस की तामील कानून में निर्धारित प्रक्रिया, जैसे व्यक्तिगत तामील, चस्पा और स्पीड पोस्ट आदि से ही होनी चाहिए. यदि आरोपी नोटिस का पालन करता है, तो उसे बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं करना चाहिए.
पुलिस की कार्रवाई अदालत की अवमानना
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने बताया कि आरएसएलडीसी में हुए घूसकांड से जुड़े मामले में एसीबी ने याचिकाकर्ता को 1 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था. इससे पहले, एसीबी के जांच अधिकारी ने 25 जनवरी 2023 को उसे व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजा और 31 जनवरी को पेश होने के लिए कहा था. याचिकाकर्ता ने एसीबी के नोटिस का जवाब देते हुए अपनी पत्नी की बीमारी के कारण समय मांगा था, लेकिन पुलिस ने बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए उसे सीधे गिरफ्तार कर लिया.
इस कार्रवाई को सीआरपीसी की धारा 41-ए की अवहेलना बताते हुए चुनौती दी गई, जिसमें कहा गया कि कानूनी प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया गया है. इसलिए, एसीबी की कार्रवाई कानून और अदालत की अवमानना है.
एसीबी ने कहा - दबाव बनाने के लिए याचिका
एसीबी ने अपने जवाब में कहा कि उन्होंने आरोपी को नोटिस दिया था, लेकिन उसने जवाब में टालमटोल रवैया रखा. एसीबी ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता एफआईआर को रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं और असफल रहे हैं, जिसके बाद अनुसंधान एजेंसी पर दबाव बनाने के लिए उसने यह अवमानना याचिका दायर की है.
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद एसीबी की गिरफ्तारी की कार्रवाई को गलत मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को तलब किया है.