चित्तौड़गढ़/डूंगरपुर। आस्था और समर्पण का एक अनूठा उदाहरण राजस्थान में सामने आया है। डूंगरपुर जिले के आसपुर निवासी किसान अमरीजी पाटीदार ने अपनी करोड़ों रुपये की संपत्ति भगवान श्री सांवलिया सेठ को समर्पित करने का फैसला किया है। उन्होंने करीब 1.50 करोड़ रुपये मूल्य की 10.15 बीघा कृषि भूमि की रजिस्ट्री भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम करा दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने बहुमंजिला मकान को भी भगवान के नाम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंदिर प्रशासन को मकान के दान संबंधी स्टांप सौंप दिए गए हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य का यह मकान भी मंदिर के नाम दर्ज हो जाएगा।
शनिवार को अमरीजी पाटीदार श्री सांवलिया सेठ मंदिर पहुंचे और मंदिर प्रशासन को आवश्यक दस्तावेज सौंपे। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई को उन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय में भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम जमीन की रजिस्ट्री कराई। इस कार्य को पूरा करने में उन्हें करीब 10 वर्षों तक प्रयास करना पड़ा। दान की गई जमीन पर आम के कई पेड़ भी हैं, जिन्हें भी उन्होंने भगवान को समर्पित कर दिया है।
अमरीजी पाटीदार ने बताया कि उनकी इच्छा है कि इस जमीन का उपयोग जनकल्याण के कार्यों में किया जाए। यदि यहां गौशाला का निर्माण हो या सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के लिए इसका उपयोग किया जाए तो उन्हें सबसे अधिक संतोष होगा। उनका मानना है कि संपत्ति का सर्वोत्तम उपयोग समाज और धर्म की सेवा में होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 से वे नियमित रूप से श्री सांवलिया सेठ के दर्शन करने जाते रहे हैं। इसी दौरान उनके मन में अपनी पूरी संपत्ति भगवान को समर्पित करने का विचार आया। वर्ष 2015-16 में उन्होंने पहली बार मंदिर प्रशासन के समक्ष अपनी इच्छा व्यक्त की थी। हालांकि, उस समय दस्तावेजों की जांच के दौरान पता चला कि संबंधित जमीन अलग-अलग हिस्सों में उनके रिश्तेदारों के नाम दर्ज थी। ऐसे में कानूनी रूप से पूरी जमीन एक साथ दान करना संभव नहीं था और प्रक्रिया कुछ समय के लिए रुक गई।
अमरीजी ने बताया कि बाद में उन्होंने सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर जमीन अपने नाम करवाई। कुल 16 बीघा जमीन उनके हिस्से में आई, लेकिन बीच-बीच में अन्य रिश्तेदारों की भूमि भी थी। उन्होंने पूरा खर्च स्वयं वहन करते हुए जमीन का समायोजन कराया। इसके बाद 10.15 बीघा भूमि भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।
श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी प्रथम एवं नायब तहसीलदार शिव शंकर पारीक ने बताया कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद करीब 1.165 हेक्टेयर यानी 10 बीघा से अधिक भूमि भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम भेंट स्वरूप दर्ज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि यह दान पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत किया गया है।
अमरीजी पाटीदार ने बताया कि पिछले दस वर्षों में मंदिर मंडल के कई अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी बदलते रहे, लेकिन उन्होंने अपनी इच्छा नहीं छोड़ी। वर्तमान मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारी द्वितीय एवं लेखाकार राजेंद्र सिंह, संपदा प्रभारी भैरू गिरी गोस्वामी और पूर्व गिरदावर गोपाल सिंह आसपुर पहुंचे, जिसके बाद दान की प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंच सकी।
भूमि दान के बाद अमरीजी श्री सांवलियाजी मंदिर पहुंचे और अपने बहुमंजिला मकान को भी भगवान के नाम समर्पित करने के लिए दान पत्र पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने बताया कि मकान की कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही यह संपत्ति भी मंदिर मंडल के नाम दर्ज हो जाएगी।
अमरीजी ने अपने निजी जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पिता का निधन 12 दिसंबर 2012 को हो गया था। इसके बाद परिवार में केवल वे और उनकी माता ही रह गए थे। अन्य रिश्तेदार दूसरे जिलों और राज्यों में रहते हैं। वर्ष 2023 में उनकी माता का भी निधन हो गया। माता-पिता की सेवा को प्राथमिकता देने के कारण उन्होंने विवाह नहीं किया।
उन्होंने बताया कि बचपन से ही उनकी भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम में गहरी आस्था रही है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते उन्होंने निर्णय लिया कि उनकी पूरी संपत्ति भगवान की होनी चाहिए। इससे पहले भी वर्ष 2013-14 में उन्होंने अपने दिवंगत पिता के कानों की सोने की मूर्कियां श्री सांवलिया सेठ को अर्पित की थीं। अब उनकी इच्छा है कि उनकी माता के करीब एक किलो चांदी के आभूषण भी भगवान को भेंट किए जाएं।
अमरीजी पाटीदार का यह निर्णय क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों रुपये की संपत्ति भगवान के नाम समर्पित करने के उनके फैसले को लोग उनकी गहरी धार्मिक आस्था, त्याग और समाजसेवा की भावना का प्रतीक मान रहे हैं।