अजमेर/ब्यावर: राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जयपुर टीमों ने शुक्रवार को अजमेर और ब्यावर में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए 'डबल ट्रैप' को अंजाम दिया है। एसीबी ने राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) के अजमेर यूनिट हेड और सीनियर डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) अंजय विश्वकर्मा को 50 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि घूसखोर सीनियर डीजीएम आगामी 31 जुलाई को ही सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त (Retire) होने वाले थे।
इसी कार्रवाई के तहत एसीबी की दूसरी टीम ने ब्यावर में तैनात रीको के जूनियर असिस्टेंट कमलेश को भी 35 हजार रुपए की घूस लेते हुए दबोच लिया है।
एसीबी मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सीनियर डीजीएम अंजय विश्वकर्मा की मूल पोस्टिंग तो किशनगढ़ में थी, लेकिन उनके पास अजमेर का भी अतिरिक्त कार्यभार (चार्ज) था। अंजय विश्वकर्मा और जूनियर असिस्टेंट कमलेश ने एक पीड़ित से उसकी फाइल और लीज डीड (Lease Deed) जारी करने के एवज में कुल 85 हजार रुपए की घूस मांगी थी। इसमें से 50 हजार रुपए सीनियर डीजीएम को और 35 हजार रुपए जूनियर असिस्टेंट को दिए जाने थे। पीड़ित की शिकायत मिलने के बाद एसीबी जयपुर की टीम ने गोपनीय तरीके से इसका सत्यापन कराया और दोनों अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ने का फुलप्रूफ प्लान तैयार किया।
रीको कार्यालय में यह हाई-प्रोफाइल कार्रवाई शुक्रवार दोपहर करीब 12:00 बजे शुरू हुई। तय रणनीति के मुताबिक, पीड़ित सबसे पहले रिश्वत के रुपए लेकर अजमेर स्थित यूनिट हेड (सीनियर डीजीएम) अंजय विश्वकर्मा के ऑफिस के अंदर गया। जैसे ही रिश्वत की रकम अधिकारी को सौंपी गई, बाहर घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने कुछ ही मिनटों के भीतर दौड़ते हुए सीधे केबिन में छापा मार दिया। अचानक हुई इस छापेमारी और रंगे हाथों गिरफ्तारी से पूरे रीको दफ्तर में हड़कंप मच गया।
एसीबी की टीमों ने घूस की राशि बरामद कर दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। रिश्वत के इस खेल में दोनों की संलिप्तता पूरी तरह साफ होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इनके सरकारी दफ्तर के दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। इसके साथ ही, पकड़े गए दोनों कर्मचारियों के निजी आवासों और अन्य ठिकानों पर भी सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है, ताकि आय से अधिक संपत्ति और अन्य वित्तीय घोटालों का पता लगाया जा सके।