गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत को देखते हुए आयोजन समिति ने एक बड़ा और साहसिक फैसला लिया है।
पारंपरिक समाधान: भोजनशाला में 12 विशाल मिट्टी की भट्टियां तैयार की गई हैं। यह संभवतः पहला मौका है जब इतने बड़े आयोजन में कमर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग नहीं किया जाएगा।
लकड़ी का स्टॉक: आयोजन समिति ने पहले ही भारी मात्रा में सूखी लकड़ियों का स्टॉक जमा कर लिया है, ताकि कथा के दौरान ईंधन की कोई कमी न रहे।
भीलवाड़ा के पन्नाधाय सर्किल के पास एक विशाल भोजनशाला बनाई गई है, जहाँ प्रतिदिन हजारों भक्तों के लिए प्रसाद तैयार होगा।
बड़ी टीम: भोजन बनाने की जिम्मेदारी 70 मुख्य हलवाइयों को सौंपी गई है। कुल 250 से अधिक कार्यकर्ताओं की टीम भोजन वितरण और व्यवस्था संभालेगी।
महिला शक्ति: प्रतिदिन एक समय के भोजन वितरण का विशेष जिम्मा महिला कार्यकर्ताओं को दिया गया है, जो व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में मदद करेंगी।
भीलवाड़ा के मेडिसिटी ग्राउंड पर होने वाली इस कथा में लाखों की भीड़ जुटने की उम्मीद है।
भारी जाब्ता: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। सुरक्षा के लिए अन्य जिलों से 1500 अतिरिक्त पुलिस जवान बुलाए गए हैं।
यातायात प्रबंधन: शहर में यातायात बाधित न हो, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस ने अलग से रूट मैप तैयार किया है।
यह धार्मिक अनुष्ठान 8 अप्रैल से 14 अप्रैल 2026 तक चलेगा।
उत्साह का माहौल: शहरवासियों के साथ-साथ बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुँच रहे हैं।
तैयारियां मुकम्मल: श्रद्धालुओं के ठहरने, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा के लिए मेडिसिटी ग्राउंड पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।