पदयात्रा में आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला:
झांकियां और भजन: पदयात्रा में विभिन्न देवी-देवताओं की मनमोहक झांकियां सजाई गईं। श्रद्धालु भजनों की धुन पर नाचते-गाते और जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े।
दंडवत प्रणाम (पेट पलायन): कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने या विशेष भक्तिभाव के चलते पूरे मार्ग पर कनक दंडवत (पेट पलायन) करते हुए रवाना हुए हैं।
भक्तों का हुजूम: यात्रा की पूर्व संध्या से ही जयपुर में प्रदेश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था।
पदयात्रियों के 5 दिवसीय प्रवास और डिग्गी पहुंचने का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:
18 अगस्त (पहला पड़ाव): मदरामपुरा में प्रथम रात्रि विश्राम।
19 से 21 अगस्त (अन्य पड़ाव): 19 अगस्त को हरसूलिया, 20 अगस्त को फागी और 21 अगस्त को चौसला में रात्रि विश्राम होगा।
22 अगस्त (डिग्गी आगमन व धार्मिक अनुष्ठान): 22 अगस्त को श्रद्धालु डिग्गीपुरी पहुंचेंगे। शाम 5 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके पश्चात भगवान कल्याणजी महाराज का गंगोत्री से लाए गए पवित्र गंगाजल से अभिषेक किया जाएगा और रात्रि में विशाल जागरण का आयोजन होगा।
श्री कल्याण डिग्गीपुरी लक्खी पदयात्रा संघ जयपुर के अध्यक्ष व संचालक श्रीजी शर्मा ने बताया कि उनका परिवार 61 वर्षों से इस परंपरा को निभा रहा है:
1964 में शुरुआत: यात्रा की शुरुआत उनकी दादी स्व. रामेश्वर लाल शर्मा ने वर्ष 1964 में की थी।
दूसरी व तीसरी पीढ़ी: वर्ष 1993 से 2011 तक उनके पिता प्रहलाद राय शर्मा ने संचालन किया, और पिछले 14 सालों से वे स्वयं (तीसरी पीढ़ी) इस लक्खी पदयात्रा का सफल संचालन कर रहे हैं।
पदयात्रियों की सेवा और सुविधा के लिए चौड़ा रास्ता से लेकर टोंक रोड और सांगानेर तक व्यापक इंतजाम किए गए हैं:
सेवा शिविर और भोजन: श्रद्धालुओं के लिए भोजन, शीतल जल और विश्राम की व्यवस्था हेतु विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं द्वारा दर्जनों भंडारे और टेंट लगाए गए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था: पुलिस व नागरिक प्रशासन ने भी पदयात्रा मार्ग पर सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था और सुगम यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।