शिक्षा विभाग द्वारा लिए गए इस नए निर्णय के दायरे में पूरे राजस्थान के करीब 346 महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय आ रहे हैं। विभाग ने ऐसे सभी स्कूलों को चिह्नित किया है, जहाँ कुल विद्यार्थियों का नामांकन 70 से भी कम रह गया है।
शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों के अनुसार, हाड़ौती संभाग के कुल 11 सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूल इस नए फैसले से प्रभावित हो रहे हैं:
जिलावार स्थिति: हाड़ौती क्षेत्र में सबसे ज्यादा स्थिति बारां जिले की चिंताजनक है, जहाँ के 7 स्कूलों में नामांकन 70 से कम मिला है। इसके अलावा बूंदी जिले के 2 स्कूल तथा कोटा और झालावाड़ जिले का 1-1 स्कूल इस सूची में शामिल है।
शिक्षार्थियों का अकाल: इन सभी चिह्नित स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम लागू किए जाने के बावजूद अभिभावकों और विद्यार्थियों का रुझान काफी कम देखा गया, जिसके कारण यहाँ छात्र संख्या 70 के आंकड़े को भी पार नहीं कर सकी।
दरअसल, प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की अनुशंसा के बाद शिक्षा विभाग ने इस दिशा में आधिकारिक कार्रवाई शुरू की है:
उच्चस्तरीय निर्देश: शिक्षा विभाग के शासन उप सचिव आलोक जैन की ओर से जारी आधिकारिक पत्र के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय (बीकानेर) ने सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों (CDEO) को कड़े निर्देश दिए हैं।
समीक्षा का उद्देश्य: विभाग यह आंकलन करना चाहता है कि जब इन सामान्य हिंदी माध्यम सरकारी स्कूलों को महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में परिवर्तित किया गया था, तब से अब तक वहाँ विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई या भारी गिरावट आई है।
कोटा के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) रामचरण मीणा ने इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार के आदेशानुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उन्होंने बताया, "ऐसे सभी अंग्रेजी माध्यम सरकारी स्कूलों का पूरा रिकॉर्ड और रिपोर्ट हमसे मांगी गई है, जहाँ विद्यार्थियों का कुल नामांकन 70 से कम है। कोटा जिले का 1 और हाड़ौती संभाग के कुल 11 स्कूलों सहित प्रदेश भर के लगभग 346 स्कूल इस दायरे में आ रहे हैं। इन सभी चिह्नित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में अब हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को भी दोबारा प्रवेश दिया जाएगा, ताकि स्कूल में संसाधनों का सही उपयोग हो सके और ग्रामीण व स्थानीय बच्चों को अपनी भाषा में पढ़ाई का विकल्प वापस मिल सके।"