मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 के तहत देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की परिकल्पना की गई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भी मानना है कि संविधान निर्माताओं की सोच का सम्मान करते हुए सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह कानून किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
सरकार का कहना है कि विधानसभा के आगामी सत्र में UCC विधेयक पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद सदन में इसे पारित कराने का प्रयास होगा। जोगाराम पटेल ने उम्मीद जताई कि सभी दलों के विधायक इस विधेयक पर सकारात्मक सहयोग करेंगे और इसे कानून का रूप देने में योगदान देंगे।
UCC विधेयक का सबसे अधिक चर्चित हिस्सा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट किया कि यदि दो बालिग व्यक्ति अपनी इच्छा से साथ रहना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने की पूरी स्वतंत्रता होगी, लेकिन इसके लिए एक कानूनी प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
सरकार के अनुसार इस प्रक्रिया का उद्देश्य व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी प्रकार की धोखाधड़ी, शोषण या कानूनी विवाद की स्थिति पैदा न हो। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संबंध कानून और संविधान के अनुरूप हों।
विधेयक के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को साथ रहने की शुरुआत के एक महीने के भीतर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए दोनों पार्टनर की आयु 21 वर्ष या उससे अधिक होना आवश्यक होगी।
सरकार इस व्यवस्था के लिए रजिस्ट्रार जनरल, स्थानीय रजिस्ट्रार, इलेक्ट्रॉनिक रजिस्टर और ऑनलाइन पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं विकसित कर सकेगी। इससे आवेदन और पंजीकरण की प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से भी पूरी की जा सकेगी।
बिल के अनुसार आवेदन मिलने के बाद रजिस्ट्रार मामले की जांच करेगा। आवश्यकता पड़ने पर दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से बुलाया जा सकता है। दस्तावेजों और तथ्यों की जांच के बाद यदि आवेदन सही पाया जाता है तो पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
यदि आवेदन में कोई गलत जानकारी, संदेहास्पद तथ्य या कानूनी बाधा पाई जाती है तो रजिस्ट्रार उसे निरस्त भी कर सकता है। हालांकि ऐसी स्थिति में रजिस्ट्रार को लिखित रूप से कारण बताना अनिवार्य होगा।
यदि किसी जोड़े का पंजीकरण आवेदन निरस्त कर दिया जाता है और वे उस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं, तो उन्हें महा रजिस्ट्रार के समक्ष अपील करने का अधिकार मिलेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना बताया गया है।
विधेयक में लिव-इन रिलेशनशिप के नाम पर धोखा देने या गलत जानकारी देने वाले मामलों में दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे लोगों पर अंकुश लगेगा जो रिश्तों का दुरुपयोग कर दूसरे पक्ष को नुकसान पहुंचाते हैं।
राजस्थान सरकार का दावा है कि UCC विधेयक समानता, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अब सबकी नजरें विधानसभा के आगामी सत्र पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है।