मकराना के इस ऐलान को आगामी नगर निकाय चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि सवर्ण समाज लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस का परंपरागत वोटर रहा है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। दोनों दल सवर्ण समाज को अपना मजबूत और स्थायी वोट बैंक मानते रहे हैं। ऐसे में अब समाज अपने राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए मतदान का फैसला करेगा।
प्रेस वार्ता के दौरान महिपाल सिंह मकराना ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से सवर्ण समाज को लेकर कई बार ऐसी टिप्पणियां की गई हैं, जिन्हें समाज ने गंभीरता से लिया है। वहीं भाजपा को लेकर उन्होंने कहा कि पार्टी में यह धारणा बनी हुई है कि सवर्ण मतदाता उसे छोड़कर आखिर कहां जाएगा।
मकराना ने कहा कि इस बार ऐसी सोच का जवाब मतदान के जरिए दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज किसी एक राजनीतिक दल के साथ बंधा हुआ नहीं है। समाज अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता का प्रदर्शन करेगा।
उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव स्थानीय स्तर पर जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में संगठन अपने समर्थकों और समाज के लोगों से राजनीतिक निर्णय पर विचार करने की अपील करेगा। करणी सेना के इस ऐलान के बाद आगामी चुनाव में इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
महिपाल सिंह मकराना ने प्रेस वार्ता में UGC रोलबैक की मांग को लेकर चल रहे संगठन के आंदोलन पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि श्री राजपूत करणी सेना पिछले कई महीनों से इस मुद्दे को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है। राजस्थान के अलग-अलग शहरों में यात्राएं, विरोध कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं।
मकराना ने कहा कि सरकार को UGC से जुड़े मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। संगठन की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते इस मामले में सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
मकराना ने कहा कि संगठन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहा है, लेकिन लंबे समय तक मांगों की अनदेखी की गई तो कार्यकर्ताओं को आंदोलन का दायरा बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से बातचीत और सकारात्मक पहल करने की अपील भी की।
निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बहिष्कार के ऐलान को भी संगठन के व्यापक राजनीतिक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है। करणी सेना के इस फैसले के बाद अब भाजपा और कांग्रेस की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर भी राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी।
राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। ऐसे समय में श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना का यह ऐलान भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
अब देखना होगा कि करणी सेना का यह आह्वान चुनाव में कितना प्रभाव डालता है और सवर्ण मतदाताओं के बीच इसका कितना असर देखने को मिलता है। फिलहाल बीकानेर से सामने आए इस ऐलान ने राजस्थान की निकाय चुनावी सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है।