Rajasthan

नागौर निकाय चुनाव में रिश्तों पर राजनीति भारी: कहीं चाचा-भतीजा तो कहीं मामा-भांजा आमने-सामने

नागौर: नगरीय निकाय चुनाव को लेकर नागौर जिले में सियासी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। टिकट वितरण और नामांकन प्रक्रिया के बीच कई निकायों में मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। इस बार चुनावी रण में सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि रिश्तेदार भी एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए नजर आ रहे हैं। कहीं चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं तो कहीं मामा-भांजे के परिवारों के बीच राजनीतिक टकराव चर्चा का विषय बना हुआ है।

 कुचेरा में चाचा-भतीजे की प्रतिष्ठा की जंग

कुचेरा नगर पालिका में इस बार मुकाबला राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बनता दिख रहा है। एक ओर रिछपाल मिर्धा भाजपा की कमान संभाले हुए हैं, तो दूसरी ओर उनके भतीजे तेजपाल मिर्धा कांग्रेस के लिए मैदान में डटे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों पहले दो बार साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं और दोनों मौकों पर तेजपाल मिर्धा पालिकाध्यक्ष बनने में सफल रहे थे। लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। रिछपाल मिर्धा के भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों अलग-अलग खेमों में आ गए हैं। ऐसे में कुचेरा का चुनाव अब सिर्फ दलों की लड़ाई नहीं, बल्कि चाचा-भतीजे की प्रतिष्ठा का सवाल भी बन गया है। वहीं आरएलपी भी यहां अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में जुटी हुई है।

 नागौर परिषद में मामा-भांजे के परिवारों में सियासी टकराव

नागौर नगर परिषद में भी रिश्तों के बीच राजनीति की खींचतान देखने को मिल रही है। यहां मांगीलाल भाटी और उनके भांजों प्रवीण सोलंकी तथा अखिलेश सोलंकी के परिवारों के बीच राजनीतिक मतभेद चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कृपाराम सोलंकी के निधन के बाद मांगीलाल भाटी को छह माह के लिए सभापति बनाया गया था। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती चली गई। पिछले चुनाव में भी दोनों पक्ष आमने-सामने रहे थे और इस बार भी इसी तरह की स्थिति बनने के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि सोलंकी परिवार की ओर से महिला प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है, हालांकि अभी तक किसी दल ने अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है।

 नामांकन का आज अंतिम दिन

नगरीय निकाय चुनाव में वार्ड पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल करने का सोमवार अंतिम दिन है। इच्छुक उम्मीदवार दोपहर 3 बजे तक अपने नामांकन पत्र जमा कर सकेंगे। जिले के 9 नगर निकायों में चुनाव होने हैं, जिनमें चार निकाय ऐसे हैं जहां पहली बार निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं।

इन क्षेत्रों में अब तक मतदाता सीधे सरपंच चुनते थे, लेकिन नगर निकाय बनने के बाद अब वार्ड पार्षदों का चुनाव होगा और चुने गए पार्षद ही आगे पालिकाध्यक्ष का चयन करेंगे। नामांकन के अंतिम दिन बड़ी संख्या में आवेदन आने की संभावना है।

रिश्तेदारी बनाम राजनीति

नागौर के चुनावी रण में इस बार राजनीतिक समीकरणों के साथ पारिवारिक रिश्तों की परीक्षा भी होने जा रही है। कभी एक-दूसरे के साथ चुनाव लड़ने वाले नेता अब अलग-अलग राजनीतिक दलों के झंडे तले आमने-सामने हैं। ऐसे में जिले के कई निकायों में मुकाबला सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा और प्रभाव की लड़ाई बन गया है।