CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि शिक्षा किसी भी देश के भविष्य की नींव होती है, लेकिन देश के कई सरकारी स्कूल आज भी साफ पेयजल, कार्यशील शौचालय, पर्याप्त शिक्षक, सुरक्षित भवन और बैठने की उचित व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। संगठन ने इन समस्याओं को केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
CJP ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों से छह महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की है। इनमें पिछले पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण का विवरण, शिक्षकों के स्वीकृत और रिक्त पदों की संख्या, शिक्षा बजट और उसके उपयोग की जानकारी, नए स्कूलों की आवश्यकता, शिक्षकों से लिए जा रहे गैर-शैक्षणिक कार्यों का ब्यौरा और स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की स्थिति शामिल है। संगठन का मानना है कि इन सवालों के जवाब सार्वजनिक होने से शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
अभिजीत दीपके ने कहा कि सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर सामने आने वाली तस्वीरें और वीडियो चिंता पैदा करते हैं। कई स्थानों पर बच्चे टूटे हुए कमरों, टीनशेड, बिना शौचालय और बिना पीने के पानी जैसी परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी परिस्थितियां बच्चों के साथ अन्याय हैं और कई मामलों में उनके साथ “जानवरों से भी बदतर व्यवहार” जैसा माहौल दिखाई देता है।
CJP का कहना है कि किसी बच्चे की शिक्षा उसके परिवार की आर्थिक स्थिति या भौगोलिक स्थान पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। संगठन ने मांग की है कि हर बच्चे को सुरक्षित कक्षा, साफ पानी, पर्याप्त शिक्षक, अच्छी गुणवत्ता की पढ़ाई और आधुनिक सुविधाओं तक समान पहुंच मिले। दीपके ने कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल कानून की किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका प्रभाव स्कूलों में दिखाई देना चाहिए।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव से की गई थी। अभियान के पहले चरण में सरकारी स्कूलों का सामाजिक ऑडिट करने, स्थानीय लोगों और अभिभावकों को स्कूलों की स्थिति की जांच के लिए प्रेरित करने तथा कमियों को दस्तावेज़ित कर प्रशासन के सामने रखने की रणनीति अपनाई गई। अभियान का उद्देश्य केवल समस्याओं को उजागर करना नहीं, बल्कि उनके समाधान के लिए जनदबाव तैयार करना भी है।
अभियान शुरू होने के बाद कई राज्यों में सरकारी स्कूलों की स्थिति पर बहस तेज हो गई है। राजस्थान सहित कुछ राज्यों में स्कूल निरीक्षण और सामाजिक ऑडिट को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हुई है। अभियान ने सरकारी स्कूलों के ढांचे, शिक्षकों की कमी और शिक्षा बजट के उपयोग जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।
CJP का कहना है कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए है। संगठन ने सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि वे स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करें और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दें। अभियान का संदेश स्पष्ट है—देश के हर बच्चे को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए, और इसके लिए सरकारों को जवाबदेह बनाना जरूरी है।