नई दिल्ली: सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी का दौर लगातार जारी है। आज, 3 जुलाई को लगातार चौथे दिन सोने और चांदी के दामों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार, सोने और चांदी दोनों ही धातुओं ने आज घरेलू बाजार में लंबी छलांग लगाई है, जिससे आम खरीदारों की जेब पर बोझ और बढ़ गया है।
बाजार में आई इस ताजा तेजी के बाद दोनों कीमती धातुओं के दाम नए स्तर पर पहुंच गए हैं:
सोना (24 कैरेट): 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 3,104 रुपए की भारी बढ़ोतरी के साथ 1,46,107 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले गुरुवार को बाजार में इसका भाव 1,43,003 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
चांदी: एक किलो चांदी के दाम में आज 4,504 रुपए का उछाल आया, जिससे यह 2,33,354 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। बीते गुरुवार (2 जुलाई) को चांदी 2,28,850 रुपए प्रति किलो पर बंद हुई थी।
चार दिन में भारी उछाल: पिछले महज चार दिनों के भीतर ही सोना 4,686 रुपए और चांदी 13,374 रुपए महंगी हो चुकी है। इस सप्ताह के पहले दिन यानी सोमवार को सोना 1.41 लाख रुपए और चांदी 2.2 लाख रुपए पर कारोबार कर रही थी।
साल 2026 में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस साल अब तक सोना 12,908 रुपए और चांदी 2,934 रुपए महंगी हो चुकी है।
दिसंबर 2025 से अब तक: 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब बढ़कर 1.46 लाख रुपए हो गया है। वहीं, चांदी जो साल के अंत में 2.30 लाख रुपए किलो थी, वह अब 2.33 लाख रुपए पर पहुंच गई है।
ऑलटाइम हाई रिकॉर्ड: गौरतलब है कि इसी साल 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का अपना ऐतिहासिक ऑलटाइम हाई रिकॉर्ड भी छुआ था।
देश के विभिन्न शहरों में सोने के भाव में अंतर देखने को मिलता है, जिसके पीछे मुख्य रूप से ये चार कारण जिम्मेदार होते हैं:
ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोने को एक शहर से दूसरे शहर सुरक्षित पहुंचाने में भारी ईंधन और सुरक्षा खर्च आता है। दूरी जितनी अधिक होगी, परिवहन लागत बढ़ने से दाम भी उतने ही बढ़ जाते हैं।
खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में देश की कुल खपत का करीब 40% हिस्सा अकेले खरीदा जाता है। बड़े ज्वेलर्स वहां थोक में बड़ी खरीदारी करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर मिलने वाले डिस्काउंट का असर कीमतों पर पड़ता है।
लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: प्रत्येक राज्य और शहर के अपने स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन होते हैं, जो स्थानीय मांग और आपूर्ति (Demand & Supply) के समीकरण को देखकर रोज सुबह अपने क्षेत्र का रेट तय करते हैं।
पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: हर जौहरी (ज्वेलर) का अपना पुराना स्टॉक और उसे खरीदने की पुरानी कीमत अलग होती है, यही वजह है कि वे अपने ग्राहकों को किस रेट पर आभूषण बेचेंगे, इसमें थोड़ा अंतर आ जाता है।