यह कार्रवाई राजस्थान सरकार के चलाए जा रहे ‘शुद्ध आहार मिलावट पर वार’ अभियान के तहत की गई है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देश पर विभाग की टीमों ने बाजारों से सरसों तेल के नमूने लिए थे। इन नमूनों को जयपुर स्थित खाद्य प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया, जहां विस्तृत परीक्षण के बाद टैगोर ब्रांड के तीन बैचों को असुरक्षित पाया गया।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एम/एस गोयल ऑयल उद्योग द्वारा निर्मित टैगोर ब्रांड सरसों तेल के बैच नंबर 1, 2 और 10 में गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन बैचों के पूरे स्टॉक को बाजार से हटाने के निर्देश दिए हैं।
विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रतिबंधित बैचों के तेल की बिक्री, वितरण, निर्माण, भंडारण और दुकानों पर प्रदर्शन पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध शुरुआती तौर पर दो महीने तक लागू रहेगा। इस दौरान यदि किसी जिले में प्रतिबंधित बैच का तेल बिकता पाया जाता है तो संबंधित व्यापारी, सप्लायर और निर्माता के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन बैचों का कितना स्टॉक राजस्थान के अलग-अलग जिलों के बाजारों तक पहुंच चुका है। इसके लिए थोक व्यापारियों, डीलरों और खुदरा दुकानदारों से जानकारी जुटाई जा रही है।
जयपुर प्रथम के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. रवि शेखावत ने आम जनता से अपील की है कि जिन लोगों के पास टैगोर ब्रांड सरसों तेल के बैच नंबर 1, 2 या 10 की बोतल या पैकिंग उपलब्ध है, वे उसका उपयोग न करें।
उन्होंने उपभोक्ताओं से कहा कि वे अपने घर में रखे तेल का बैच नंबर जरूर जांच लें। यदि पैकिंग पर प्रतिबंधित बैच नंबर लिखा है तो उसे खाना बनाने में इस्तेमाल न करें और संबंधित विक्रेता को वापस कर दें।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी खाद्य सामग्री की खरीदारी करते समय पैकिंग, निर्माण तिथि, बैच नंबर और गुणवत्ता संबंधी जानकारी जरूर जांचें।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने प्रदेशभर के व्यापारियों और खाद्य कारोबारियों को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठानों, गोदामों और स्टॉक की जांच करने को कहा गया है। यदि उनके पास टैगोर ब्रांड सरसों तेल के प्रतिबंधित बैच मौजूद हैं तो उन्हें तुरंत बिक्री से हटाकर अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा व्यापारियों को प्रतिबंधित स्टॉक की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है, ताकि बाजार से असुरक्षित खाद्य सामग्री को पूरी तरह हटाया जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई के बाद एम/एस गोयल ऑयल उद्योग द्वारा सप्लाई किए गए अन्य बैचों की भी रैंडम जांच की जा रही है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बाजार में पहुंचा कोई अन्य उत्पाद भी उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा न बने।
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए सैंपलिंग अभियान लगातार तेज किया जा रहा है। सरसों तेल, घी, मावा, मसाले और अन्य खाद्य वस्तुओं की नियमित जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद खाद्य तेल कारोबारियों में भी सतर्कता बढ़ गई है। विभाग का कहना है कि आम लोगों को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और मिलावट या खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।