नागौर: नागौर के सुप्रसिद्ध और आस्था के बड़े केंद्र 'संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर' (बुटाटी धाम) में कथित तौर पर हुए 22.74 करोड़ रुपए के भारी वित्तीय गबन का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। जिला प्रशासन की ओर से पेश की गई जांच रिपोर्ट के बाद मंदिर प्रबंधन समिति और प्रशासन आमने-सामने हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने इस जांच रिपोर्ट को सिरे से 'फर्जी' और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताते हुए जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
इस बीच, जांच रिपोर्ट में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए वर्तमान अध्यक्ष समेत कुल 11 वर्तमान और पूर्व समिति सदस्यों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने और उनकी निजी संपत्तियों को कुर्क करने की बड़ी सिफारिश की गई है।
सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने प्रशासन की इस कार्रवाई को पूरी तरह एकतरफा बताया। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे:
सुनवाई का मौका नहीं मिला: देवेंद्र सिंह ने बताया कि 30 अप्रैल को उन्हें प्रशासन की तरफ से नोटिस मिला था, लेकिन उससे पहले ही जांच से जुड़े सभी दस्तावेज जब्त कर लिए गए थे। इसके बाद मंदिर समिति के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के कैंसर पीड़ित होने और उनके ऑपरेशन के चलते जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय मांगा गया था, जो उन्हें नहीं दिया गया।
1100 पन्नों के दस्तावेज किए पेश: उन्होंने दावा किया कि गत 23 जून को उन्होंने बिल, वाउचर और बैंक खातों की प्रतियों सहित करीब 1100 पन्नों का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड जांच समिति को सौंप दिया था, जिसकी आधिकारिक रसीद भी उनके पास सुरक्षित है। इसके बावजूद इन दस्तावेजों को जांच में शामिल नहीं किया गया।
अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच प्रक्रिया और कोरम पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 13 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति की बैठक में केवल 6 सदस्य ही उपस्थित थे। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि इतने बड़े वित्तीय मामलों की जांच के लिए जिस 'अकाउंट्स एक्सपर्ट' (लेखा विशेषज्ञ) का होना अनिवार्य था, वह भी उस बैठक में मौजूद नहीं था।
सिंह ने आरोप लगाया कि 26 जून को हुई समिति की अहम बैठक में उन्हें शामिल होने तक नहीं दिया गया और सुरक्षा गार्ड ने उन्हें बाहर ही रोक दिया। ऐसे में बिना किसी एक्सपर्ट और बिना पूरे कोरम के 22 करोड़ की गड़बड़ी का यह आंकड़ा किस आधार पर तैयार किया गया, यह पूरी तरह पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की ओर इशारा करता है।
मंदिर में हुए विकास कार्यों और आय को लेकर लग रहे आरोपों पर देवेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट की:
भोजनशाला निर्माण: भोजनशाला के निर्माण पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्य पुरानी समिति के समय हुए समझौते के तहत ही शुरू हुआ था। उनके कार्यकाल में केवल उस अधूरे काम को पूरा कराया गया है। इस निर्माण में भामाशाहों (दानदाताओं) से 46 लाख रुपए का सहयोग मिला था और बाकी की राशि नियमों के तहत ही खर्च की गई है।
एटीएम का किराया: एसबीआई (SBI) एटीएम से होने वाली आय के गबन के आरोपों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि एटीएम का किराया सीधे मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में ऑनलाइन आता है, जिसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है।
अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने मंदिर में फर्जी रसीदें काटे जाने के आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि सभी रसीद बुकों का प्रिंटिंग रिकॉर्ड और एंट्री रजिस्टर पूरी तरह सुरक्षित है।
उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि जब से मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं के लिए 'मुफ्त भोजनशाला' (निःशुल्क अन्नक्षेत्र) की शुरुआत की है, तब से कुछ स्थानीय होटल और गेस्ट हाउस संचालक उनके कट्टर विरोधी हो गए हैं क्योंकि इससे उनका निजी व्यवसाय प्रभावित हुआ है। सिंह ने बताया कि मुफ्त भोजनशाला शुरू होने के पहले ही दिन उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसकी रिपोर्ट सीसीटीवी (CCTV) फुटेज के साथ कुचेरा थाने में दर्ज कराई गई थी। उन्हीं लोगों की शह पर यह पूरी साजिश रची जा रही है।
दूसरी तरफ, मंदिर समिति के इन सभी आरोपों को जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने सिरे से खारिज कर दिया है। कलेक्टर ने कहा कि पूर्व कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित द्वारा 29 जनवरी 2026 को गठित की गई 13 सदस्यीय समिति की बैठक में सभी आवश्यक सरकारी अधिकारी और सदस्य मौजूद थे।
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 15.16 करोड़ रुपए का प्रमाणित गबन पाया था। वहीं, वर्ष 2025-26 का रिकॉर्ड न सौंपने के कारण 'प्रतिकूल अनुमान' के तहत 7.58 करोड़ रुपए जोड़कर कुल 22.74 करोड़ रुपए के कथित गबन का आकलन नियमानुसार किया गया है। प्रशासन इस मामले में सिफारिशों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।