पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह हादसा दौसा के कोलवा थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में तुरंत आग लग गई। मृतकों में से 6 लोगों की जान आग में जिंदा झुलसने के कारण हुई, वहीं 2 यात्रियों की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने की वजह से हुई।
यह स्लीपर बस (हंस ट्रेवल्स) ऋषिकेश से मध्य प्रदेश के इंदौर जा रही थी। हादसे के वक्त बस में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के करीब 40 पैसेंजर्स सवार थे। हादसे में मारे गए 7 मृतकों के शव इस कदर झुलस चुके हैं कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि मृतकों की पहचान के लिए DNA टेस्ट कराया जाएगा, जिसके बाद ही शव परिजनों को सौंपे जाएंगे।
दौसा के विधायक दीनदयाल बैरवा ने इस हादसे पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि स्लीपर बस में आग लगने के बाद यात्री बाहर नहीं निकल सके, क्योंकि बस का इमरजेंसी गेट जाम था और समय पर नहीं खुला। अगर इमरजेंसी गेट खुल जाता, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
बस में सवार एक जीवित बचे पैसेंजर ने बताया कि बस मंगलवार शाम करीब 5 बजे ऋषिकेश से इंदौर के लिए रवाना हुई थी। एक्सीडेंट के तुरंत बाद ही बस आग का गोला बन गई। यात्री ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद करीब एक घंटे तक घायलों को मौके पर कोई मदद या रेस्क्यू टीम नहीं मिली।
इस भीषण सड़क हादसे पर राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ईश्वर से मृतकों की पुण्यात्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह असीम दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। साथ ही, उन्होंने हादसे में घायल हुए सभी यात्रियों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए दौसा की जिला कलेक्टर सौम्या झा ने त्वरित एक्शन लिया है। उन्होंने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए 8 सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है। कलेक्टर ने टीम को निर्देश दिए हैं कि वे घटना की हर पहलू से बारीकी से जांच करें और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपें।