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बीकानेर में बड़ा हादसा टला: सरकारी स्कूल के क्लासरूम की छत ढही, मलबे में तब्दील हुआ फर्नीचर

बीकानेर: बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है, जहां एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के कमरे की छत की पट्टियां टूटकर नीचे गिर गईं। गनीमत यह रही कि यह हादसा छुट्टियों के दौरान हुआ, जिससे उस वक्त कमरे में कोई बच्चा या शिक्षक मौजूद नहीं था, अन्यथा कई मासूमों की जान पर बन सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

स्कूल खुलते ही खुला खौफनाक मंजर; क्लासरूम नंबर-7 की टूटकर गिरीं 10 पट्टियां

सोमवार सुबह जब लंबे अवकाश के बाद स्कूल स्टाफ परिसर में पहुंचा, तब जाकर इस हादसे की भनक लगी:

  • ताले खोलते ही दिखा मलबा: स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि सोमवार को ग्रीष्मावकाश खत्म होने के बाद जब स्टाफ कक्षाओं के ताले खोलने पहुंचा, तो कक्षा संख्या-7 का नजारा देखकर सब दंग रह गए। कमरे की छत की 10 भारी-भरकम पट्टियां पूरी तरह टूटकर नीचे गिरी हुई थीं।

  • फर्नीचर पूरी तरह क्षतिग्रस्त: छत का भारी मलबा सीधे बच्चों के बैठने वाली टेबलों और कुर्सियों पर गिरा था, जिससे कमरे में रखा सारा फर्नीचर चकनाचूर हो गया। स्टाफ ने राहत की सांस ली कि हादसे के वक्त स्कूल में बच्चे नहीं थे।

 

पूरा स्कूल भवन हुआ जर्जर; अब पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर हुए मासूम

इस घटना के बाद स्कूल प्रशासन के सामने बच्चों को बैठाने का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है:

  • बैठने लायक नहीं बचा एक भी कमरा: प्रधानाचार्य के मुताबिक, यह समस्या सिर्फ एक कमरे तक सीमित नहीं है। पूरे स्कूल की बिल्डिंग (भवन) इस कदर जर्जर हो चुकी है कि अब एक भी कमरा ऐसा नहीं बचा है जहां बच्चों को सुरक्षित बैठाकर पढ़ाया जा सके।

  • खुले आसमान के नीचे पढ़ाई: बच्चों की जान को खतरे में न डालते हुए स्कूल प्रबंधन ने फिलहाल एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब आगामी आदेशों या व्यवस्था होने तक विद्यार्थियों की कक्षाएं स्कूल परिसर में स्थित पेड़ों की छाया के नीचे यानी खुले में लगाई जाएंगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को लिखित पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है।

 

PWD पहले ही दे चुका था चेतावनी; फाइलों में दबी रही अधिकारियों की कार्रवाई

इस मामले में सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि प्रशासन को इस खतरे का अंदाजा पहले से था, लेकिन समय रहते कदम नहीं उठाए गए:

  • ग्राम शिविर में उठा था मुद्दा: सरपंच प्रतिनिधि गिरधारी सिंह ने बताया कि हाल ही में 22 जून 2026 को आयोजित हुए 'ग्राम सेवा शिविर' में ग्रामीणों ने इस स्कूल की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।

  • विभाग ने माना था खतरा: ग्रामीणों की शिकायत के बाद सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की तकनीकी टीम ने स्कूल का मौका मुआयना किया था। जांच के बाद PWD ने बकायदा इस भवन को 'असुरक्षित और जर्जर' घोषित कर दिया था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग सोया रहा और कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।

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