जयपुर: राजस्थान में सफाई कर्मचारियों की लंबित मांगों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद अब सड़कों पर आ गया है। प्रदेशभर के सफाई कर्मियों ने शनिवार से सामूहिक अवकाश पर जाकर पूरी तरह से कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। हड़ताल के पहले ही दिन राजधानी जयपुर सहित राज्य के कई प्रमुख शहरों में सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह गंदगी और कचरे के बड़े-बड़े ढेर लगने शुरू हो गए हैं। वहीं, जयपुर के परकोटे में आक्रोशित कर्मचारियों ने अनोखे अंदाज में सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
शनिवार को जयपुर के ऐतिहासिक और वीवीआईपी इलाकों में सफाई कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिला:
सड़क पर खाली किया कचरा: जयपुर के बड़ी चौपड़ पर प्रदर्शन कर रहे सफाई कर्मचारियों ने कचरा डिपो की तरफ जा रहे एक ट्रैक्टर को बीच रास्ते में ही रोक लिया। कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप ट्रैक्टर की ट्रॉली को बीच सड़क पर ही अनलॉक कर पूरा कचरा वहीं खाली करवा दिया।
झाड़ू नीचे रखकर प्रदर्शन: बड़ी चौपड़ के अलावा छोटी चौपड़, जौहरी बाजार, राजा पार्क और परकोटे (चारदीवारी) के कई प्रमुख बाजारों में भी कर्मचारियों ने सड़कों पर कचरा फैला दिया। सफाई कर्मियों ने 'झाड़ू नीचे रखकर' सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए।
सफाई कर्मचारियों के संगठनों का साफ कहना है कि उन्हें मजबूरन इस हड़ताल और उग्र प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा है:
सकारात्मक पहल का इंतजार: संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने बताया कि सफाई कर्मचारी पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे थे। वे लगातार अपनी न्यायसंगत मांगें सरकार तक पहुंचाने की कोशिश में जुटे थे।
मजबूरन लिया फैसला: डंडोरिया ने आरोप लगाया कि इतने दिनों के शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद सरकार या उच्चाधिकारियों की ओर से वार्ता या कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई। इसी उपेक्षा के कारण मजबूर होकर आंदोलन को अगले चरण (सामूहिक अवकाश) में ले जाने का कड़ा फैसला करना पड़ा।
श्रमिक संघ के नेताओं ने इस आंदोलन को सफाई कर्मचारियों के अस्तित्व से जोड़ दिया है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं:
अधिकारों की लड़ाई: संघ अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल नई भर्ती का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के सफाई कर्मचारियों के भविष्य, मान-सम्मान और अधिकारों की बड़ी लड़ाई है। अगर इस बार सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं हुआ, तो आने वाले समय में सफाई कर्मचारियों के रोजगार और उनकी सामाजिक सुरक्षा पर बड़ा संकट आ सकता है।
प्रदेशव्यापी एकजुटता: संगठन ने राजस्थान के सभी जिलों और नगरीय निकायों के सफाई कर्मचारियों से इस आंदोलन में पूरी तरह एकजुट रहने और मांगें पूरी होने तक काम पर न लौटने का आह्वान किया है। दूसरी तरफ, जिला प्रशासन और नगर निगम की टीमें शहरों के बिगड़ते हालातों को संभालने और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाने के प्रयासों में जुटी हुई हैं।