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भीलवाड़ा में कांग्रेस की अंदरूनी कलह फिर सामने आई: PCC सदस्य ने डोटासरा के खिलाफ किया ‘सद्बुद्धि यज्ञ’, इस्तीफे की मांग

भीलवाड़ा। राजस्थान के निकाय चुनावों के बीच कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक होती नजर आई। भीलवाड़ा जिला कांग्रेस कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) सदस्य मनोज पालीवाल ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष ‘डोटासरा सद्बुद्धि यज्ञ’ किया। पालीवाल ने यज्ञ के दौरान अग्नि को साक्षी मानकर डोटासरा के लिए सद्बुद्धि की प्रार्थना की और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।

यज्ञ के बाद पालीवाल ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और प्रभारी मुकेश वर्मा की कथित नाकामी के कारण कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल लेटर समय पर जमा नहीं हो सके। उनके मुताबिक, इससे पार्टी के प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को नुकसान उठाना पड़ा।

पालीवाल ने कहा कि महापौर चुनाव में भी शहर में कांग्रेस के सिंबल नहीं दिए गए। उनका आरोप था कि देहात की सभी नगरपालिकाओं में सिंबल भेजे गए, लेकिन भीलवाड़ा शहर में ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने इस मामले को स्थानीय कांग्रेस संगठन के साथ जोड़ते हुए कहा कि शहर जिलाध्यक्ष दलित समुदाय से आते हैं और उन्हें नीचा दिखाने के लिए कथित तौर पर यह स्थिति पैदा की गई।

पालीवाल ने डोटासरा पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वे अपनी जिम्मेदारी संभालने में नाकाम साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने यज्ञ के जरिए भगवान से प्रार्थना की है कि डोटासरा को सद्बुद्धि मिले और वे अपने पद से इस्तीफा दे दें।

‘पार्टी से निकाल दें, फिर भी कार्यकर्ताओं के लिए आवाज उठाऊंगा’

पीसीसी सदस्य ने यह आशंका भी जताई कि डोटासरा के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने के कारण उनके खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, पालीवाल ने कहा कि वे कार्यकर्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

उनके इस सार्वजनिक विरोध के बाद राजस्थान कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा में आ गई है। खासतौर पर निकाय चुनावों के दौरान टिकट, सिंबल और संगठनात्मक फैसलों को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत सामने आए हैं।

पायलट खेमे से पालीवाल की नजदीकी की चर्चा

मनोज पालीवाल को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर का करीबी माना जाता है। गुर्जर को सचिन पायलट के राजनीतिक खेमे से जुड़ा नेता माना जाता है। ऐसे में पालीवाल द्वारा डोटासरा के खिलाफ सीधे मोर्चा खोलने को पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, पालीवाल के इस कदम को सीधे तौर पर किसी गुट की आधिकारिक रणनीति मानने से पहले उनके व्यक्तिगत बयान और पार्टी के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया को अलग-अलग देखना जरूरी है।

डोटासरा के बयान पर गहलोत भी जता चुके हैं नाराजगी

दूसरी ओर, स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान डोटासरा के ‘रोड शो का जवाब रोड से देने’ वाले बयान को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके हैं। ऐसे में भीलवाड़ा में पार्टी के ही एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी द्वारा डोटासरा के खिलाफ यज्ञ किए जाने से प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही बहस फिर तेज हो गई है।

फिलहाल, पालीवाल के आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा या पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए सिंबल लेटर समय पर जमा नहीं होने और इसके पीछे लगाए गए राजनीतिक आरोपों को पालीवाल के दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।