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निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा संगठनात्मक दांव, 200 विधानसभा क्षेत्रों में नियुक्त किए चुनाव समन्वयक

राजस्थान में आगामी नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने संगठन को बूथ और वार्ड स्तर तक सक्रिय करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य की सभी 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव समन्वयकों (इलेक्शन कोऑर्डिनेटर) की नियुक्ति करते हुए वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

कांग्रेस की इस रणनीति का उद्देश्य निकाय चुनावों में मजबूत और जिताऊ प्रत्याशियों की पहचान करना, स्थानीय कार्यकर्ताओं से समन्वय बढ़ाना और टिकट वितरण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठनात्मक तैयारी के जरिए निकाय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

200 नेताओं को मिली विधानसभा स्तर की जिम्मेदारी

जारी आदेश के अनुसार प्रदेशभर की 200 विधानसभा सीटों के लिए अलग-अलग चुनाव समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। ये समन्वयक अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं और संभावित दावेदारों से संवाद करेंगे। साथ ही क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों और उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं का आकलन भी करेंगे।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि जमीनी स्तर की सही जानकारी के आधार पर प्रत्याशियों का चयन करने से चुनावी सफलता की संभावना बढ़ेगी। इसी कारण इस बार संगठन ने फीडबैक आधारित चयन प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया है।

24 से 26 अगस्त तक तीन दिवसीय प्रवास

पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सभी जिला प्रभारियों, सह-प्रभारियों और चुनाव समन्वयकों को 24, 25 और 26 अगस्त तक संबंधित जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में तीन दिवसीय प्रवास करने के निर्देश दिए हैं।

इस दौरान जिला मुख्यालयों पर आयोजित बैठकों की अध्यक्षता संबंधित जिलाध्यक्ष करेंगे, जबकि विधानसभा क्षेत्रों में ब्लॉक स्तर पर होने वाली बैठकों की जिम्मेदारी ब्लॉक अध्यक्षों के पास होगी। इन बैठकों में स्थानीय कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और टिकट के दावेदारों से चर्चा कर संगठनात्मक स्थिति का आकलन किया जाएगा।

प्रत्याशी चयन पर रहेगा विशेष फोकस

कांग्रेस की इस कवायद का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य निकाय चुनावों के लिए उपयुक्त और मजबूत प्रत्याशियों की पहचान करना है। जिला प्रभारी और चुनाव समन्वयक संयुक्त रूप से कार्यकर्ताओं से राय लेकर उम्मीदवारों की सामाजिक स्वीकार्यता, संगठन के प्रति निष्ठा, जनाधार और जीतने की क्षमता का मूल्यांकन करेंगे।

पार्टी चाहती है कि टिकट वितरण के समय स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार के असंतोष या विवाद की स्थिति कम से कम रहे। इसलिए प्रारंभिक स्तर पर ही व्यापक फीडबैक जुटाने की रणनीति अपनाई गई है।

27 अगस्त तक देनी होगी रिपोर्ट

डोटासरा ने सभी नियुक्त पदाधिकारियों और समन्वयकों के लिए स्पष्ट समय-सीमा भी निर्धारित की है। निर्देशों के अनुसार तीन दिनों के प्रवास और बैठकों के बाद सभी समन्वयकों को 27 अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, जयपुर में जमा करानी होगी।

रिपोर्ट में क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति, संभावित उम्मीदवारों की सूची, संगठन की मजबूती और चुनावी संभावनाओं का पूरा आकलन शामिल होगा। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

गुटबाजी रोकने की रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस बार निकाय चुनावों में गुटबाजी और आंतरिक खींचतान से बचने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। विधानसभा स्तर पर समन्वयकों की नियुक्ति इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

पार्टी नेतृत्व का प्रयास है कि टिकट वितरण से पहले सभी पक्षों की राय ली जाए और संगठन के भीतर एकजुटता का संदेश दिया जाए। निकाय चुनावों को आगामी बड़े चुनावों की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है, इसलिए कांग्रेस कोई भी चूक नहीं करना चाहती।

कुल मिलाकर, निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस ने संगठन को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव समन्वयकों की रिपोर्ट और जमीनी फीडबैक के आधार पर पार्टी किस तरह अपने उम्मीदवारों का चयन करती है और चुनावी मैदान में उतरती है।