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अलवर में सेटेलाइट अस्पताल की छत का प्लास्टर और पंखा गिरा, डॉक्टर का सिर फटा, महिला मरीज घायल

अलवर: राजस्थान के अलवर जिले से एक बेहद हैरान और विचलित करने देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के सेटेलाइट हॉस्पिटल में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया, जब ओपीडी (OPD) रूम में मरीजों को देख रहे डॉक्टर और एक महिला मरीज पर चलती हालत में छत का भारी-भरकम प्लास्टर और पंखा आ गिरा। इस दर्दनाक हादसे में सीनियर डॉक्टर का सिर फट गया, जबकि महिला मरीज को भी गंभीर चोटें आई हैं।

यह पूरी घटना अस्पताल के ओपीडी रूम नंबर-7 की है, जहाँ सीनियर डॉक्टर सीताराम अग्रवाल रोजाना की तरह सुबह मरीजों की जांच कर रहे थे।

 

डॉक्टर का सिर फटा, बोले- 'बड़ी मुश्किल से जान बचाकर बाहर निकले'

हादसे में घायल हुए सीनियर डॉक्टर सीताराम अग्रवाल ने आपबीती बताते हुए कहा:

"सुबह करीब साढ़े 10 बजे का समय था और मैं रूम नंबर-7 में एक महिला मरीज की जांच कर रहा था। इसी दौरान बिना किसी आहट के अचानक छत से सीमेंट का मोटा प्लास्टर और सीलिंग फैन हमारे ऊपर गिर गया। हादसे के बाद कमरे में अफरा-तफरी मच गई। मैं और मरीज बड़ी मुश्किल से कमरे से बाहर निकल पाए। इस हादसे में मेरा सिर फट गया है और सिर में कई टांके आए हैं।"

 

थायरॉयड की जांच कराने आई थी महिला, नाक और हाथ-पैर में आई गंभीर चोटें

अस्पताल की पीएमओ (PMO) डॉ. प्रमीला मीणा ने घटना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि हादसे के वक्त टीना (25) नाम की एक महिला डॉक्टर के पास थायरॉयड की जांच कराने आई थी। टीना मूल रूप से लक्ष्मणगढ़ की रहने वाली है और वर्तमान में अलवर के कालाकुआं क्षेत्र में रह रही है।

 

इस हादसे में टीना को काफी गंभीर चोटें आई हैं:

  • उसकी नाक पर गहरा घाव हुआ है, जहाँ तीन टांके लगाने पड़े हैं।

  • इसके अलावा उसके दाहिने हाथ और पैर में भी गंभीर चोटें आई हैं।

  • प्राथमिक उपचार के बाद महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल (रेफरल अस्पताल) के लिए रेफर कर दिया गया है। वहीं डॉक्टर सीताराम अग्रवाल का इलाज इसी अस्पताल में चल रहा है।

 

10 महीने से लिखे जा रहे थे पत्र, ₹15.5 लाख मंजूर होने के बाद भी PWD ने नहीं किया काम

अस्पताल प्रशासन ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। पीएमओ डॉ. प्रमीला मीणा ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पिछले करीब 10 महीनों से पीडब्ल्यूडी विभाग को लगातार पत्र लिखे जा रहे थे और चेतावनी दी जा रही थी।

यही नहीं, करीब चार महीने पहले ही अस्पताल भवन के मरम्मत कार्य के लिए लगभग 15.5 लाख रुपए का बजट भी स्वीकृत करवाकर विभाग को भेज दिया गया था। लेकिन इसके बावजूद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने मरम्मत का काम शुरू नहीं करवाया और मामले को लटकाए रखा।

 

'समय पर काम होता तो टाला जा सकता था हादसा'

पीएमओ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर विभाग ने समय रहते सुध ली होती और मरम्मत कार्य करवा दिया होता, तो आज इस बड़े हादसे को आसानी से टाला जा सकता था। विभागीय लापरवाही के कारण डॉक्टर और मरीज की जान पर बन आई। वहीं, हादसे की सूचना मिलते ही और मामला गरमाता देख अब पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे हैं और जर्जर भवन का निरीक्षण कर रहे हैं।

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