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पंचायत-निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट की सख्त फटकार: राज्य चुनाव आयोग को 5 दिन का अल्टीमेटम

जयपुर: राजस्थान में लंबे समय से अटके पड़े पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने साफ किया है कि हर हाल में अदालती आदेशों की पालना सुनिश्चित होनी चाहिए।

हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए राज्य चुनाव आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अगले 5 दिन के भीतर (आगामी सोमवार तक) चुनाव की तारीखों का अनिवार्य रूप से ऐलान करे। इसके साथ ही, अदालत ने अन्य संबंधित पक्षों को भी समय सीमा में बांध दिया है।

 

सोमवार तक ओबीसी आयोग और सरकार भी सौंपे अपनी डेडलाइन

पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए तीन महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए:

  1. राज्य चुनाव आयोग: सोमवार तक अदालती पटल पर चुनाव कराने की निश्चित तारीखों की जानकारी दे।

  2. ओबीसी आयोग: अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने की तय तारीख से कोर्ट को अवगत कराए।

  3. राज्य सरकार: सीटों के आरक्षण के वर्गीकरण के लिए निकाली जाने वाली लॉटरी की तारीख स्पष्ट करे।

इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद रहे, जिन्हें जजों की तल्ख टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।

चुनाव आयुक्त की दलील- 'हम तैयार हैं, सरकार से लॉटरी मिलते ही 2 दिन में करा देंगे चुनाव'

सुनवाई के दौरान जब खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह से सीधे लहजे में पूछा, "आप ऐसा क्यों चाहते हैं कि न्यायालय आपके खिलाफ अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू करे?"

इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए चुनाव आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि आयोग के स्तर पर चुनाव संपन्न कराने की तैयारियां पूरी हैं। उन्होंने देरी का ठीकरा सरकार पर फोड़ते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक सीटों के आरक्षण का अंतिम वर्गीकरण करके आयोग को उपलब्ध नहीं कराया है। यदि सरकार आज हमें लॉटरी निकालकर दे देती है, तो चुनाव आयोग महज 2 दिन के भीतर प्रदेश में चुनाव की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

ओबीसी आयोग को फटकार: 'जब 3 महीने का समय दिया था, तो रिपोर्ट क्यों नहीं दी?'

अदालत ने ओबीसी आयोग के सदस्य सचिव को आड़े हाथों लेते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि जब 9 मई 2025 को सरकार ने विशेष तौर पर 3 महीने की अवधि के लिए इस आयोग का गठन किया था, तो तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट तैयार क्यों नहीं की गई? पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "अगर आपसे काम नहीं संभलता है, तो साफ मना कर दीजिए।"

इसके जवाब में ओबीसी आयोग की ओर से दलील दी गई कि विभाग के पास पर्याप्त प्रशासनिक और तकनीकी संसाधन मौजूद नहीं थे, जिसके कारण रिपोर्ट समय पर तैयार नहीं हो सकी। इस दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने दोटूक कहा कि बहानों से काम नहीं चलेगा, हर हाल में अदालती आदेश लागू होने चाहिए।

 

आदेश की पालना न करने की मंशा पर उठाए सवाल; 31 जुलाई की थी अंतिम समय सीमा

हाईकोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछा कि जब पूर्व में ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि चुनाव आयोग को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है, तो फिर चुनाव की घोषणा को क्यों रोक कर रखा गया?

साथ ही, ओबीसी आयोग द्वारा रिपोर्ट सौंपने के लिए 14 अगस्त तक का समय मांगने पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। बेंच ने कहा, "जब हमने 31 जुलाई तक हर हाल में चुनाव कराने के निर्देश दे रखे थे, तो आपने रिपोर्ट के लिए 14 अगस्त की तारीख अपने स्तर पर कैसे तय कर ली? इसका सीधा मतलब यही निकलता है कि आप कोर्ट के आदेश की पालना करने के प्रति गंभीर नहीं हैं।"

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने बीती 22 मई को एक बड़ा आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक प्रदेश में सभी लंबित पंचायत और निकाय चुनाव कराने के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन तय समय सीमा नजदीक आने के बावजूद अभी तक इसकी औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

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