जयपुर/चौमूं: जयपुर जिले के चौमूं उपखंड अधिकारी (SDM) आशीष शर्मा इन दिनों अपनी त्वरित प्रशासनिक कार्यशैली और जनसुनवाई के दौरान बुजुर्गों के अधिकारों को लेकर दिए गए कड़े संदेशों के कारण प्रदेशभर में सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनके कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा करने वाले बेटों और बहुओं को सख्त हिदायत देते नजर आ रहे हैं।
ताजा मामला जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह का है, जहां एक प्रशासनिक शिविर के दौरान उन्होंने एक पीड़ित बुजुर्ग मां के हक में मौके पर ही फैसला सुनाते हुए बेटे को हर महीने भरण-पोषण भत्ता देने का पाबंद किया।
जानकारी के अनुसार, चौमूं क्षेत्र के गुड़लिया गांव में एक प्रशासनिक शिविर सह जनसुनवाई का आयोजन किया गया था। इस शिविर में एक बुजुर्ग महिला अपनी बेटियों के साथ पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण न मिलने की गंभीर शिकायत लेकर एसडीएम के समक्ष पेश हुई। एसडीएम आशीष शर्मा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर उनकी बात सुनी।
सच्चाई सामने आने पर एसडीएम ने बिना किसी देरी के मौके पर ही फैसला सुनाया और बेटे को अपनी बुजुर्ग मां के भरण-पोषण के लिए प्रति माह 5,000 रुपए देने का कानूनी आदेश जारी कर दिया। मौके पर ही हुए इस त्वरित न्याय का वीडियो अब इंटरनेट पर जमकर सराहना बटोर रहा है।
गुड़लिया गांव के शिविर में जनसुनवाई के दौरान एसडीएम आशीष शर्मा का एक और बयान सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है, जिसमें वे परिवार के सदस्यों को कड़े शब्दों में कानून का पाठ पढ़ा रहे हैं। एसडीएम ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी देते हुए कहा:
"अगर पिताजी और मां के बारे में कोई भी गलत बात करेगा या उनके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार (Misbehave) करेगा, तो मैं उसे सीधे उठाकर जेल में डाल दूंगा।"
प्रशासन के इस सख्त और संवेदनशील रुख की आम जनता जमकर तारीफ कर रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे कदमों से असहाय बुजुर्गों में अपने अधिकारों के प्रति विश्वास जगता है।
यह पहला मौका नहीं है जब एसडीएम आशीष शर्मा अपने काम को लेकर चर्चा में हैं। इससे पहले जुलाई के प्रथम सप्ताह में भी उनका एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें वे एक अन्य बुजुर्ग महिला को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहे थे। उन्होंने महिला से कहा था कि यदि कोई बुजुर्ग अपनी जमीन-जायदाद बेटों या बहू के नाम कर देता है और उसके बाद उसे सम्मान या उचित देखभाल नहीं मिलती, तो वे बिना किसी डर या संकोच के सीधे उनके न्यायालय (कोर्ट) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
शर्मा का जो वीडियो सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है, उसमें वे स्थानीय राजस्थानी बोली में एक बुजुर्ग महिला को ढांढस बंधाते हुए कह रहे हैं:
"अम्मा, आपने अपनी पूरी जमीन बच्चों के नाम कर दी है, लेकिन अगर अब आपकी बहू आपको समय पर गर्म रोटी भी नहीं दे, तो सीधे मेरे कोर्ट में आ जाना।"
अधिकारी के मुंह से स्थानीय भाषा में इतनी आत्मीय और सुरक्षात्मक बात सुनकर ग्रामीण बेहद प्रभावित हैं और यही वजह है कि यह वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड कर रहा है।
राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में अक्सर ऐसे दुःखद मामले देखने को मिलते हैं, जहां बुजुर्ग माता-पिता अपने जीवनभर की कमाई या संपत्ति बच्चों के नाम ट्रांसफर करने के बाद अकेलेपन, उपेक्षा और बुनियादी जरूरतों (भरण-पोषण) के लिए मोहताज हो जाते हैं। ऐसे गंभीर सामाजिक मामलों में उपखंड प्रशासन की यह सक्रिय और त्वरित भूमिका ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। सोशल मीडिया पर लोग इसे 'संवेदनशील प्रशासन' का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं, जिससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जा रहा है।