मैच के शुरुआती दो ओवरों के बाद इंग्लैंड ने एक विकेट के नुकसान पर 10 रन बनाए। कप्तान हैरी ब्रूक और अनुभवी बल्लेबाज जोस बटलर क्रीज पर मौजूद रहे, जबकि सलामी बल्लेबाज फिल सॉल्ट को प्रसिद्ध कृष्णा ने पवेलियन भेजकर भारत को शुरुआती सफलता दिलाई।
भारत ने इस मुकाबले के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में दो अहम बदलाव किए। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को टीम से बाहर कर दिया गया, जबकि उनकी जगह अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन की वापसी हुई। इसके अलावा ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर की जगह सूर्यांश शेडगे को मौका दिया गया।
वैभव सूर्यवंशी को इस सीरीज में लगातार तीन मैच खेलने का अवसर मिला था, लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने तीन पारियों में क्रमशः 14, 13 और 15 रन बनाए। कुल मिलाकर उनके बल्ले से केवल 42 रन निकले। टीम प्रबंधन ने निर्णायक मुकाबले में अनुभव को प्राथमिकता देते हुए संजू सैमसन पर भरोसा जताया।
संजू सैमसन लंबे समय से भारतीय टी-20 टीम का हिस्सा रहे हैं और मध्यक्रम के साथ-साथ विकेटकीपिंग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टीम को उम्मीद है कि उनकी वापसी बल्लेबाजी को मजबूती देगी।
युवा ऑलराउंडर सूर्यांश शेडगे को भी अंतिम मुकाबले में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। टीम प्रबंधन उन्हें भविष्य के खिलाड़ी के रूप में देख रहा है। उनकी मौजूदगी से भारत को बल्लेबाजी की गहराई के साथ-साथ अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प भी मिलेगा।
भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। उनका मानना था कि शाम के समय परिस्थितियां गेंदबाजों के लिए मददगार हो सकती हैं और बाद में बल्लेबाजी करना अपेक्षाकृत आसान रहेगा।
टॉस के दौरान अय्यर ने ट्रैफिक जाम से हुई देरी पर कहा कि ऐसी परिस्थितियां खिलाड़ियों के नियंत्रण से बाहर होती हैं और टीम ने इसे लेकर कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी मानसिक रूप से तैयार थे और मैदान पर उतरने के बाद उनका पूरा ध्यान केवल मैच पर रहा।
रोज बाउल स्टेडियम के आसपास भारी ट्रैफिक के कारण भारतीय टीम समय पर स्टेडियम नहीं पहुंच सकी। इससे टॉस निर्धारित समय पर नहीं हो पाया और मैच की शुरुआत भी करीब 45 मिनट देर से हुई।
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में दोनों टीमें मैच से काफी पहले स्टेडियम पहुंच जाती हैं ताकि अभ्यास, वार्म-अप और रणनीति पर अंतिम चर्चा कर सकें। लेकिन इस बार सड़क पर यातायात बाधित होने से कार्यक्रम प्रभावित हुआ। हालांकि अधिकारियों ने स्थिति संभालते हुए मैच को सुरक्षित तरीके से शुरू कराया।
इंग्लैंड की ओर से फिल सॉल्ट और जोस बटलर ने पारी की शुरुआत की। भारतीय तेज गेंदबाजों ने शुरुआत से ही सटीक लाइन और लेंथ बनाए रखी।
प्रसिद्ध कृष्णा ने नई गेंद से शानदार गेंदबाजी करते हुए फिल सॉल्ट को आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई। शुरुआती विकेट मिलने के बाद भारतीय गेंदबाजों ने रन गति पर भी नियंत्रण बनाए रखा। दो ओवर समाप्त होने तक इंग्लैंड ने एक विकेट खोकर केवल 10 रन बनाए थे। कप्तान हैरी ब्रूक और जोस बटलर पारी को संभालने की कोशिश कर रहे थे।
पांच मैचों की इस टी-20 सीरीज में इंग्लैंड का दबदबा साफ दिखाई दिया। शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर उसने सीरीज पर पहले ही कब्जा जमा लिया था। ऐसे में पांचवां मैच केवल सम्मान और आत्मविश्वास के लिहाज से भारत के लिए महत्वपूर्ण बन गया।
भारतीय टीम पूरी सीरीज में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी। कई मौकों पर अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद टीम मैच खत्म करने में नाकाम रही। वहीं इंग्लैंड ने संतुलित प्रदर्शन करते हुए लगातार जीत दर्ज की।
भारतीय टीम पिछले छह टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से जीत दर्ज नहीं कर सकी है। लगातार हार ने टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। युवा खिलाड़ियों को अवसर देने की रणनीति फिलहाल अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है।
हालांकि इस सीरीज में कई नए खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव हासिल किया, लेकिन टीम को जीत दिलाने में वे सफल नहीं रहे। अनुभवी खिलाड़ियों की कमी कई बार स्पष्ट दिखाई दी।
इंग्लैंड के लिए यह मुकाबला केवल सीरीज का आखिरी मैच नहीं बल्कि आईसीसी टी-20 रैंकिंग के लिहाज से भी बेहद अहम है। यदि मेजबान टीम यह मुकाबला जीतती है तो उसके पास टी-20 रैंकिंग में दुनिया की नंबर-1 टीम बनने का अवसर होगा।
इसी कारण इंग्लैंड ने अंतिम मुकाबले में भी मजबूत प्लेइंग इलेवन उतारी और जीत की लय बनाए रखने की कोशिश की।
भारत की लगातार खराब प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी सक्रिय हो गया है। आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बोर्ड इस महीने भारतीय टीम के प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा करेगा।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा कि टीम उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी है। बोर्ड यह जानने का प्रयास करेगा कि लगातार हार के पीछे क्या कारण रहे और भविष्य में किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने संकेत दिए कि टीम चयन, खिलाड़ियों के प्रदर्शन, रणनीति और तैयारी के सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों को देखते हुए यह समीक्षा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पूरी सीरीज में भारत की बल्लेबाजी सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई। शीर्ष क्रम के बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में सफल नहीं रहे। मध्यक्रम भी दबाव की परिस्थितियों में जिम्मेदारी नहीं निभा सका।
इसी कारण अंतिम मुकाबले में संजू सैमसन जैसे अनुभवी बल्लेबाज को शामिल किया गया। टीम को उम्मीद है कि वह पारी को संभालने के साथ-साथ तेज गति से रन भी बना सकेंगे।
भारतीय गेंदबाजों ने कुछ मुकाबलों में अच्छी शुरुआत जरूर दिलाई, लेकिन बीच के ओवरों और डेथ ओवरों में रन रोकने में कठिनाई हुई। अंतिम मैच में प्रसिद्ध कृष्णा ने शुरुआती विकेट लेकर सकारात्मक शुरुआत दी।
अर्शदीप सिंह, अक्षर पटेल और शिवम दुबे जैसे गेंदबाजों पर भी बड़ी जिम्मेदारी होगी कि वे इंग्लैंड की मजबूत बल्लेबाजी को नियंत्रित रखें।
भारत की अंतिम एकादश में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, अक्षर पटेल, प्रिंस यादव, अर्शदीप सिंह और प्रसिद्ध कृष्णा शामिल हैं।
इंग्लैंड की टीम में फिल सॉल्ट, जोस बटलर (विकेटकीपर), हैरी ब्रूक (कप्तान), जैकब बेथेल, टॉम बैंटन, सैम करन, विल जैक्स, लियम डॉसन, आदिल रशीद, जोफ्रा आर्चर और जोश टंग को जगह मिली है।
हालांकि सीरीज का परिणाम पहले ही तय हो चुका है, लेकिन भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला आत्मविश्वास हासिल करने का बड़ा अवसर है। लगातार हार के बाद जीत के साथ सीरीज समाप्त करना खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा सकता है।
दूसरी ओर इंग्लैंड अपनी जीत की लय बरकरार रखते हुए सीरीज का शानदार अंत करना चाहेगा। साथ ही टीम की नजर आईसीसी टी-20 रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करने पर भी रहेगी।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत अंतिम मुकाबले में वापसी करते हुए जीत दर्ज कर पाएगा या फिर इंग्लैंड अपनी शानदार फॉर्म जारी रखते हुए सीरीज का समापन एक और जीत के साथ करेगा। इस मैच का परिणाम दोनों टीमों के आत्मविश्वास और आगामी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।