मध्यप्रदेश में नए साल 2026 के पहले दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है। उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालुओं की करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन लगी है। सुबह 11 बजे तक करीब 85 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। विश्वकप विजेता महिला क्रिकेट टीम की सदस्य भी बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंची।
ग्वालियर में यातायात पुलिस और एसोसिएशन ऑफ ग्वालियर यूथ सोसाइटी लोगों को दूध का वितरण कर रही है। इसके साथ मैसेज दे रही है कि नए साल की शुरुआत शराब से नहीं, दूध से करें। एएसपी अनु बेनिवाल ने भी दूध से भरा गिलास लोगों को दिया।
देर रात तक चला न्यू ईयर सेलिब्रेशन साल 2025 की विदाई और 2026 के वेलकम के लिए रात में ग्रैंड सेलिब्रेशन हुआ। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर-जबलपुर हो या उज्जैन, पचमढ़ी, मांडू। देर रात तक पूरा प्रदेश जश्न में डूबा रहा। रात ठीक 12 बजे 'हैप्पी न्यू ईयर' गूंज उठा।
दतिया में पीतांबरा माई और धूमावती माई के दर्शन के लिए सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। सर्द हवाओं के बीच माई के जयकारे लगाते हुए श्रद्धालु कतारों में खड़े नजर आए। सिंह द्वार बंद होने के कारण प्रशासन ने पश्चिम द्वार, उत्तर द्वार और नवीन उत्तर द्वार से दर्शन की व्यवस्था की, ताकि श्रद्धालुओं को सही से प्रवेश मिल सके। बाहर से आए श्रद्धालुओं ने पहले से ही ठहरने की बुकिंग कर रखी थी। शहर के सभी होटल फुल हैं। नए साल पर फूल-माला और प्रसाद से ही 1.5 करोड़ का कारोबार होने का अनुमान है।
सीहोर में नए साल पर प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। यह पेशवा कालीन श्री गणेश धाम है। मंदिर की पुजारी पंडित चारु चंद्र व्यास ने बताया कि सीहोर जिले ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गणेश मंदिर आए हुए हैं। इस बार विशेष व्यवस्था की गई है। सभी श्रद्धालु कतार में जाकर भगवान के दर्शन कर रहे हैं। कोहरे और ठंड में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणेश मंदिर पहुंच रहे हैं।
दमोह जिले के जागेश्वरधाम बांदकपुर में पट खुलते ही नए साल पर श्रद्धालु बाबा जागेश्वरनाथ जी के दर्शन करने पहुंचने लगे हैं। भगवान जागेश्वरनाथ को 13वें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। क्योंकि वे स्वयंभू हैं और 17वीं शताब्दी में जमीन से प्रकट हुए थे। कहा जाता है कि चारों धाम की यात्रा करने के बाद भगवान जागेश्वरनाथ के दर्शन करने के बाद ही इस यात्रा का फल मिलता है। इसलिए यहां प्रदेश के अलावा देश भर से भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिए साल भर पहुंचते हैं।