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राजस्थान में विधानसभा सीटों की संख्या 70 बढ़कर कुल 270 हो सकती है

राजस्थान विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी के अनुसार, अगली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन में राजस्थान में विधानसभा सीटों की संख्या 70 बढ़कर कुल 270 हो सकती है. देवनानी ने कहा कि अभी विधानसभा में 200 विधायक बैठते हैं, और परिसीमन के बाद 70 नए विधायक जुड़ सकते हैं. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, सदन में 280 विधायकों के बैठने की क्षमता का हॉल तैयार करवाया जाएगा, जिसका स्ट्रक्चर तैयार है.

देवनानी ने यह बात जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में अपनी किताब के विमोचन और 2 साल के अध्यक्ष के कामकाज के कार्यक्रम में कही. उन्होंने बताया कि अभी युवा संसद और छात्र संसद जैसे कार्यक्रमों में बच्चे और बाहरी लोग सदन में आते हैं, और आईपैड को नुकसान पहुंचाते हैं.

स्पीकर के इस बयान के बाद विधानसभा सीटों में संभावित बढ़ोतरी और फेरबदल को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. राजस्थान में साल 1977 के बाद से विधानसभा सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में संसद की तर्ज पर सेंट्रल हॉल बनाने के लिए 14 करोड़ रुपये की घोषणा की है, जहाँ सभी दलों के विधायक बैठकर चर्चा कर सकेंगे और चाय-नाश्ते व भोजन की व्यवस्था भी होगी. मौजूदा सदन में 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है, लेकिन परिसीमन के बाद 70 विधायक बढ़ने पर यह छोटा पड़ जाएगा. विधानसभा में विधान परिषद के लिए भी एक सदन का स्ट्रक्चर बना हुआ है, जिसे विधायकों की संख्या बढ़ने पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

राजस्थान विधानसभा सीटों का ऐतिहासिक परिदृश्य:
1952: पहले विधानसभा चुनाव में 160 सीटें थीं.
1957: 16 सीटें बढ़ीं, कुल 167 विधानसभा क्षेत्र हुए.
1967: 8 सीटें और बढ़ीं, कुल 184 सीटें हुईं.
1977: आखिरी बार सीटों की संख्या बढ़कर 200 हुई, जिसके बाद से कोई बदलाव नहीं हुआ है.

जनगणना के बाद विधानसभा सीटों के परिसीमन से प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर बदलने की उम्मीद है. सीटों की संख्या बढ़ने से नए नेताओं को अवसर मिलेंगे. परिसीमन में कई सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होंगी, जबकि कुछ सीटें सामान्य श्रेणी में रहेंगी. कुछ विधानसभा क्षेत्र समाप्त हो सकते हैं, और नए विधानसभा क्षेत्र बन सकते हैं. SC, ST के लिए ओपन कैटेगरी वाली सीटों के आरक्षित होने से मौजूदा कई अनारक्षित वर्ग के नेताओं के निर्वाचन क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, वहीं नई सीटों के बनने से कई नेताओं के लिए विधायक बनने के अवसर भी बनेंगे.

परिसीमन के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर विधानसभा क्षेत्रों के इलाकों में बदलाव और सीटों की संख्या बढ़ने पर अंतिम फैसला होगा. परिसीमन के बाद साल 2028 में चुनाव होने की संभावना है.