बातचीत की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में अगर वह अपने आवास पर नियमित रूप से किसी वर्ग के लोगों से मिले हैं तो उनमें खिलाड़ी प्रमुख रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों की लगातार मेहनत, सफलता और नई ऊंचाइयों को छूने की परंपरा ने देश का गौरव बढ़ाया है।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद पोडियम पर भावुक होने का जिक्र किया। पीएम मोदी ने चानू से कहा कि उनके इतने आंसू निकल रहे थे कि ऐसा लगा, जैसे हर बूंद से गोल्ड मेडल टपक रहा हो।
मीराबाई चानू ने अपनी सफलता के पीछे की कठिन यात्रा साझा करते हुए बताया कि पेरिस ओलिंपिक में पदक से चूकने के बाद उनके लिए पिछले चार साल बेहद मुश्किल रहे। इस दौरान उन्हें लगातार चोटों और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चानू ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने के बाद जब वह पोडियम पर खड़ी थीं और राष्ट्रगान बज रहा था, तो वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता था। यह उनके कॉमनवेल्थ गेम्स करियर का चौथा पदक और लगातार तीसरा गोल्ड था।
मुलाकात के दौरान भारतीय बॉक्सर नरेंद्र बेरवाल ने पाकिस्तान के एक बॉक्सर से जुड़े पुराने मुकाबले का मजेदार किस्सा भी सुनाया। उन्होंने 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का जिक्र करते हुए बताया कि उनका पहला मुकाबला पाकिस्तान के बॉक्सर से हुआ था।
बेरवाल के मुताबिक मुकाबले से पहले भारतीय सेना की ओर से उन्हें फोन आया था और कहा गया था कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला नहीं हारना है। उन्होंने मुकाबला जीत लिया। दोनों बॉक्सर इस दौरान चोटिल भी हुए और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे।
बेरवाल ने बताया कि अस्पताल में पाकिस्तानी बॉक्सर ने उनसे मजाकिया अंदाज में कहा कि उनका नाम नरेंद्र है, उनके कोच का नाम भी नरेंद्र है और भारत के प्रधानमंत्री का नाम भी नरेंद्र है। इसके बाद उसने कहा कि उसे अब 'नरेंद्र' नाम से ही नफरत हो गई है। यह किस्सा सुनकर प्रधानमंत्री मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक सके।
भारतीय बॉक्सर जादुमणि सिंह ने भी प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में पाकिस्तान के खिलाफ अपने मुकाबले का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि 26 जुलाई को प्री-क्वार्टरफाइनल मुकाबले में उन्होंने पाकिस्तान के रहमान सुमामा को 5-0 से हराया था।
जादुमणि ने बताया कि यह मुकाबला कारगिल विजय दिवस के दिन हुआ था और वह भारतीय सेना से जुड़े हैं। ऐसे में उन्होंने मुकाबले से पहले ही तय कर लिया था कि पाकिस्तान के खिलाफ जीत हासिल करनी है।
मुकाबला जीतने के बाद जादुमणि ने अपना पदक कारगिल युद्ध के वीर जवानों को समर्पित किया। उनकी इस भावना की प्रधानमंत्री ने भी सराहना की और उनके जज्बे की तारीफ की।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी उपलब्धियां केवल पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के युवाओं को खेलों की ओर प्रेरित करने का काम भी करती हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण को देश की खेल संस्कृति को मजबूत करने वाला बताया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने विभिन्न खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। मीराबाई चानू सहित कई खिलाड़ियों ने पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। चानू की जीत को प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी भारतीय वेटलिफ्टिंग की बड़ी उपलब्धि बताया था।
खिलाड़ियों के साथ प्रधानमंत्री की यह मुलाकात उपलब्धियों का जश्न मनाने के साथ-साथ उनके संघर्षों को समझने का भी अवसर बनी। मीराबाई चानू की भावुक कहानी से लेकर नरेंद्र बेरवाल के मजेदार किस्से और जादुमणि सिंह के देशभक्ति से जुड़े अनुभव तक, बातचीत में खेल, संघर्ष, देशभक्ति और उपलब्धि के कई रंग देखने को मिले।