अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही ट्रस्ट में 3 नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है।
यह प्रशासनिक बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के लगभग 3 महीने बाद हुआ है, जिसमें 8 आरोपी फिलहाल जेल में हैं। इस प्रकरण के बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद सेवानिवृत्त IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी।
राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन के तहत तीन नए चेहरों को शामिल किया गया है:
महेश भागचंदका: दिल्ली निवासी महेश भागचंदका को ट्रस्ट में नया सदस्य बनाया गया है।
मदन मोहन पांडेय: अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय नए सदस्य के रूप में शामिल हुए हैं।
निर्मला यादव: शिकोहाबाद निवासी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) समर्थक निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया गया है। वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी बनी हैं।
नवनिर्वाचित सीईओ जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर अत्यंत गौरवशाली और उपलब्धियों से भरा रहा है:
सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल (SYSM): उन्होंने भारतीय वायुसेना में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) की कमान संभाली थी। इस सैन्य अभियान में उनके अद्वितीय नेतृत्व के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित 'सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक' (SYSM) से सम्मानित किया गया।
39 साल का सैन्य अनुभव: वायुसेना में करीब 40 वर्षों के अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फाइटर स्क्वाड्रन और कमांड्स का नेतृत्व किया।
जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है:
उत्तर प्रदेश से नाता: एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। इस तरह राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य प्रशासनिक पद पर उनका यूपी कनेक्शन भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा है।
सुरक्षा व भीड़ प्रबंधन में मदद: अयोध्या राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और बड़े पैमाने पर ऑपरेशंस के सुचारू संचालन के लिए उनके 40 साल के सैन्य प्रशासनिक अनुभव का सीधा फायदा ट्रस्ट को मिलेगा।