दिल्ली: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी से जुड़े बेहद संवेदनशील मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। सोमवार दोपहर 3:30 बजे हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले की जांच के लिए नए सिरे से विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने के निर्देश दिए हैं। देश की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि नई एसआईटी की कमान किसी वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी के हाथों में होनी चाहिए, ताकि यह जांच किसी ठोस और निर्णायक नतीजे तक पहुंच सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में कहा, "यह जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। हम केवल एक स्पष्ट चेतावनी दे रहे हैं— कृपया इस पूरे मुद्दे का किसी भी स्तर पर राजनीतिकरण न करें और इस पर राजनीति बंद हो।" शीर्ष अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को करेगी।
सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता और चीफ जस्टिस के बीच जांच की वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तार से बातचीत हुई, जो इस प्रकार रही:
सॉलिसिटर जनरल: हमने मामले की स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है। जांच पूरी मुस्तैदी से चल रही है और इस सिलसिले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
चीफ जस्टिस: अभी इस पूरे मामले की जांच कौन सी एजेंसी या अधिकारी कर रहा है?
सॉलिसिटर जनरल: शुरुआत में सच्चाई का पता लगाने के लिए एक एसआईटी बनाई गई थी। फिलहाल स्थानीय पुलिस इसकी जांच को आगे बढ़ा रही है। एसआईटी ने अपनी शुरुआती पड़ताल में पाया है कि यह एक संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) है।
चीफ जस्टिस: हम चाहते हैं कि एसआईटी का दोबारा पुनर्गठन किया जाए। इस नई टीम में कुछ वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल होने चाहिए और इसकी अगुआई आईपीएस स्तर का अधिकारी करे, जिससे जांच पारदर्शी रहे और किसी अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे। हम 3-4 दिनों के भीतर दोबारा इस पर सुनवाई करेंगे और जांच के हर एक पहलू पर बारीकी से गौर करेंगे। आप राज्य सरकार से बात कर एसआईटी के लिए योग्य अधिकारियों के नाम तय करें।
सॉलिसिटर जनरल: जी हां, हम अदालत के निर्देशानुसार नई एसआईटी का गठन करेंगे और इसके विवरण को रिकॉर्ड पर रखेंगे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत और अन्य वकीलों ने मंदिर के चढ़ावे को लेकर कई गंभीर दावे किए:
वकील देवदत्त कामत: उत्तर प्रदेश सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर में आने वाले दान की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। ऐसी लगातार मीडिया रिपोर्ट्स आ रही हैं कि मंदिर से कीमती चीजें गायब हो गई हैं।
CJI की टिप्पणी: इस पर चीफ जस्टिस ने वकील को टोकते हुए कहा कि आपको थोड़ा व्यावहारिक होना पड़ेगा। बाहर तो लोग कुछ भी दावा कर सकते हैं कि उन्होंने हीरा दान किया है। जांच का आधार यह होना चाहिए कि जहां भी दान की आधिकारिक रसीद दी गई है, उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए।
वकील: वर्तमान में इस मामले की जांच कोई बड़ी एसआईटी नहीं, बल्कि अयोध्या के स्थानीय सर्कल ऑफिसर (CO) कर रहे हैं।
CJI: हम इन सभी परिस्थितियों को देख रहे हैं कि आगे क्या कदम उठाना है। हम आगामी सोमवार को इस संबंध में नए और आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों की पालना करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने रविवार देर रात इस मामले की अब तक की प्रगति की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी थी। यह रिपोर्ट बेहद गोपनीयता बरतते हुए एक सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को सौंपी गई।
विदित रहे कि इससे पूर्व 13 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था और एसआईटी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और बहुमूल्य वस्तुओं की कथित चोरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कुल चार अलग-अलग जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं:
सीबीआई जांच: स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर अविश्वास जताते हुए पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की गई है।
एक्सपर्ट कमेटी का गठन: राम मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपए के चढ़ावे, अचल संपत्तियों और भारी मात्रा में मिलने वाले सोने-चांदी के पारदर्शी प्रबंधन व सुरक्षा की समीक्षा के लिए देश के वित्तीय और प्रशासनिक विशेषज्ञों की एक विशेष कमेटी बनाने की गुहार लगाई गई है।