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15 मिनट में भारत के नाम दो गोल्ड, कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में पहली बार रचा इतिहास


अस्मिता डे और हर्ष सिंह बने चैंपियन, मेडल टैली में भारत 9वें स्थान पर; बॉक्सिंग में भी 5 गोल्ड की उम्मीद

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए महज 15 मिनट के भीतर दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग के फाइनल मुकाबले जीतकर भारत को गोल्ड दिलाया। खास बात यह रही कि कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत ने पहली बार जूडो में स्वर्ण पदक जीता है।

रात 8:56 बजे महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने कनाडा की हेइडी क्वाच को 2-1 से हराकर भारत को पहला गोल्ड दिलाया। इसके ठीक 15 मिनट बाद, रात 9:11 बजे, 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 (वाजा-अरी) से मात देकर दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इन दो स्वर्ण पदकों के साथ भारत की पदक तालिका में स्थिति भी मजबूत हुई। भारतीय दल अब तक 5 गोल्ड, 10 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज सहित कुल 19 पदक जीतकर मेडल टैली में 9वें स्थान पर पहुंच गया है।

अस्मिता डे ने शानदार वापसी कर जीता फाइनल

महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे की शुरुआत आसान नहीं रही। मुकाबले के शुरुआती चरण में उन्होंने एक अंक गंवा दिया और बाद में उन्हें एक पेनल्टी भी मिली, जिससे कनाडा की हेइडी क्वाच ने बढ़त बना ली।

हालांकि अस्मिता ने दबाव में भी आक्रामक खेल जारी रखा। चार मिनट के मुकाबले के मध्य तक उन्होंने स्कोर 1-1 से बराबर कर लिया। इसके बाद निर्णायक क्षणों में शानदार तकनीक और संयम का प्रदर्शन करते हुए उन्होंने मैच अपने नाम कर लिया और भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया।

हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी को नहीं दिया मौका

पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में हर्ष सिंह का मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज से था। काट्ज ने शुरुआत में आक्रामक खेल दिखाया, लेकिन हर्ष ने बेहतरीन बचाव करते हुए उन्हें कोई बढ़त नहीं बनाने दी।

एक समय ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने हर्ष को पिन करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने शानदार तरीके से खुद को बचाया और पलटवार किया। चार मिनट तक चले मुकाबले में लंबे समय तक कोई अंक नहीं बना। अंतिम मिनट में हर्ष ने निर्णायक दांव लगाकर वाजा-अरी हासिल की और 10-0 की बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने मैच पर पूरी पकड़ बनाए रखी और स्वर्ण पदक जीत लिया।

यामिनी मौर्य पर भी निगाहें

जूडो में भारत का अभियान यहीं नहीं रुका। महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में यामिनी मौर्य भी फाइनल में उतरने वाली हैं। उनसे भी भारत को स्वर्ण पदक की उम्मीद है।

बॉक्सिंग में भी गोल्ड की प्रबल उम्मीद

जूडो के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पदकों की उम्मीद बढ़ा दी है। भारत के पांच मुक्केबाज फाइनल में पहुंच चुके हैं और कम से कम सिल्वर पदक पक्का कर चुके हैं।

पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में जादुमणि सिंह ने नामीबिया के फिलिप हाउसेब को हराकर फाइनल में जगह बनाई।

महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में प्रीति पवार ने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराया, जबकि जैस्मीन लम्बोरिया ने 57 किलोग्राम वर्ग में लेसोतो की रेप्लेंग मसेला को आरएससी (RSC) से हराकर स्वर्ण पदक मुकाबले में प्रवेश किया।

वहीं अरुंधति चौधरी भी फाइनल में पहुंच चुकी हैं। पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग में अंकुश पंघाल ने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराते हुए फाइनल का टिकट कटाया। अंकुश ने तीनों राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा।

अब भारत को बॉक्सिंग में भी कई स्वर्ण पदकों की उम्मीद है। यदि भारतीय मुक्केबाज फाइनल मुकाबले जीतने में सफल रहते हैं, तो पदक तालिका में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है।