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कॉमनवेल्थ गेम्स: जैस्मिन, प्रीति और सोमन ने दिलाया भारत को गोल्ड, कुल 30 पदकों के साथ छठे स्थान पर पहुंचा देश

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शनिवार को भारत ने तीन और स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में बड़ा इजाफा किया। महिला मुक्केबाज जैस्मिन लांबोरिया, प्रीति पवार और पैरा शॉटपुट खिलाड़ी सोमन राणा ने अपने-अपने वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। वहीं पुरुषों की 55 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में जादुमणि सिंह ने रजत पदक अपने नाम किया।

इन शानदार प्रदर्शनों के साथ भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है, जबकि कुल पदकों का आंकड़ा 30 तक पहुंच गया। पदक तालिका में भारत अब छठे स्थान पर पहुंच गया है। भारतीय दल के पास अभी और पदक जीतने का अवसर है, क्योंकि सात मुक्केबाज अभी भी अपने-अपने फाइनल मुकाबले खेलने वाले हैं।

महिला बॉक्सिंग की 57 किलोग्राम भार वर्ग में जैस्मिन लांबोरिया ने फाइनल मुकाबले में नॉर्दर्न आयरलैंड की मिकाएला वॉल्स को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। जैस्मिन ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक और संतुलित खेल का प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की।

इसी तरह 54 किलोग्राम भार वर्ग में प्रीति पवार ने कनाडा की सवाना डोलमागो को मात देकर गोल्ड मेडल हासिल किया। हरियाणा की प्रीति भारतीय महिला मुक्केबाजी की उभरती हुई सितारा हैं। वह इससे पहले 2022 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप और 2023 एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 2024 पेरिस ओलिंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वर्ष 2026 एशियन चैंपियनशिप और 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की थी। वर्तमान में उनकी ट्रेनिंग एनएस-एनआईएस पटियाला में होती है।

पैरा एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। एफ-57 वर्ग के शॉटपुट में सोमन राणा ने सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 13.40 मीटर का थ्रो फेंका और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में भारत के शुभम जुयाल ने 13.28 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता। एफ-57 वर्ग में वे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं, लेकिन उनके ऊपरी शरीर की क्षमता सामान्य रहती है।

पुरुषों की 55 किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में भारत के जादुमणि सिंह को फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जाई डिकसन से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने रजत पदक जीतकर भारत की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

एथलेटिक्स में भी भारत का प्रदर्शन सराहनीय रहा। पुरुष ट्रिपल जंप स्पर्धा में प्रवीण चित्रावेल ने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। वहीं सेल्वा प्रभु ने 16.52 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ कांस्य पदक हासिल किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक जाम्बिया के जॉर्डन स्कॉट ने 16.72 मीटर की छलांग के साथ अपने नाम किया।

भारतीय मुक्केबाजों के लिए दिन अभी समाप्त नहीं हुआ है। सात और खिलाड़ी स्वर्ण पदक के लिए फाइनल मुकाबलों में उतरेंगे। इनमें साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), ओलिंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा), अंकुश पंघाल (80 किग्रा) और नरेंद्र बरवाल (90+ किग्रा) शामिल हैं। इन मुकाबलों से भारत की पदक संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।

भारतीय खिलाड़ियों के लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में देश की स्थिति को और मजबूत किया है। बॉक्सिंग, पैरा एथलेटिक्स और एथलेटिक्स में मिली सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय खिलाड़ी विभिन्न खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं। अब सभी की निगाहें बाकी फाइनल मुकाबलों पर हैं, जहां भारत के पास स्वर्ण पदकों की संख्या में और इजाफा करने का सुनहरा अवसर है।