India

FCRA संशोधन विधेयक JPC को भेजा गया, विपक्ष के विरोध के बीच सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसे विस्तृत जांच और समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का फैसला किया है। संसद में विधेयक को लेकर जारी राजनीतिक विवाद और विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने यह निर्णय लिया। लोकसभा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी।

विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन अल्पसंख्यकों और सामाजिक संगठनों को प्रभावित कर सकता है। वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य केवल विदेशी फंडिंग के नियमन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।

अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है कानून: सरकार

समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है क्योंकि इससे कई संगठनों की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि FCRA संशोधन किसी भी समुदाय या अल्पसंख्यक वर्ग के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी फंडिंग के उपयोग को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए यह संशोधन ला रही है। सरकार का दावा है कि इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले मामलों में स्पष्ट व्यवस्था बनेगी और वैध संगठनों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।

31 सदस्यीय होगी संयुक्त संसदीय समिति

प्रस्ताव के अनुसार गठित होने वाली संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें 21 सदस्य लोकसभा और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे। लोकसभा के सदस्यों का चयन लोकसभा अध्यक्ष द्वारा तथा राज्यसभा के सदस्यों का चयन सभापति द्वारा किया जाएगा।

समिति की बैठक के लिए लगभग 11 सदस्यों का कोरम निर्धारित किया गया है। लोकसभा ने राज्यसभा से भी अनुरोध किया है कि वह अपने 10 सदस्यों के नाम समिति के लिए नामित करे ताकि समीक्षा प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सके।

शीतकालीन सत्र में आएगी रिपोर्ट

JPC को विधेयक की विस्तृत जांच, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श तथा विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा के बाद अपनी रिपोर्ट संसद के 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक प्रस्तुत करनी होगी।

समिति के कामकाज पर संसद की स्थायी समितियों से जुड़े नियम लागू होंगे। आवश्यकता पड़ने पर समिति के अध्यक्ष कार्यप्रणाली में बदलाव भी कर सकेंगे।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक 2026?

FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट विदेशी स्रोतों से मिलने वाले चंदे और उसके उपयोग को नियंत्रित करने वाला कानून है। 2026 के प्रस्तावित संशोधन में विशेष रूप से उन संस्थाओं की विदेशी फंडिंग और उससे निर्मित संपत्तियों के प्रबंधन पर ध्यान दिया गया है जिनका FCRA पंजीकरण रद्द, समाप्त या स्वेच्छा से सरेंडर हो जाता है।

विधेयक में प्रावधान है कि ऐसी स्थिति में विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों को एक नामित प्राधिकरण (Designated Authority) के नियंत्रण में रखा जाएगा। यदि बाद में संगठन का पंजीकरण बहाल हो जाता है या नवीनीकरण मिल जाता है, तो कुछ शर्तों के तहत संपत्तियां और अप्रयुक्त विदेशी फंड वापस दिए जा सकेंगे।

इसके अलावा विधेयक में FCRA कानून या नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा को वर्तमान 5 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

राजनीतिक बहस जारी

विधेयक को JPC के पास भेजे जाने के बाद फिलहाल संसद में तत्काल टकराव टल गया है, लेकिन राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। विपक्ष जहां समिति के सामने अपनी आपत्तियां रखेगा, वहीं सरकार उम्मीद कर रही है कि विस्तृत समीक्षा के बाद विधेयक को व्यापक समर्थन मिल सकेगा। आने वाले महीनों में JPC की सिफारिशें इस विधेयक के अंतिम स्वरूप को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।