रविवार को लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देशों की सोच और दिशा बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा, "भारत इनोवेशन के रास्ते खोज रहा है, जबकि पाकिस्तान घुसपैठ के रास्ते खोज रहा है। भारत जहाज डिजाइन कर रहा है, वहीं पाकिस्तान आतंकवाद को डिजाइन करने में लगा हुआ है। भारत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जबकि पाकिस्तान टेरर इकोसिस्टम खड़ा कर रहा है। भारत सेमीकंडक्टर बना रहा है और पाकिस्तान सुसाइड बॉम्बर तैयार कर रहा है।"
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत अंतरिक्ष में नए-नए सैटेलाइट भेज रहा है, जबकि पाकिस्तान अब भी आतंकवादियों को सीमा पार भेजने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर उपलब्ध करा रहा है, जबकि पाकिस्तान दुनिया को स्लीपर सेल दे रहा है। भारत डेटा सेंटर विकसित कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से दुनिया को जोड़ने का काम कर रहा है, जबकि पाकिस्तान हवाला नेटवर्क और कट्टरपंथ के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है।
रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान के साथ भविष्य में किसी भी तरह की वार्ता को लेकर भारत का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत की मंशा पूरी तरह साफ है और पाकिस्तान के साथ कोई सामान्य बातचीत नहीं होगी। यदि भविष्य में कोई बातचीत होती भी है तो वह केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) पर होगी, क्योंकि वह भारत का अभिन्न हिस्सा है और उस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।
राजनाथ सिंह ने कारगिल वॉर मेमोरियल को भारत की विविधता और एकता का सबसे बड़ा प्रतीक बताते हुए कहा कि इस स्मारक में देश के हर कोने से आए वीर सैनिकों के नाम दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि यहां हिमाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों के शहीदों के नाम अंकित हैं। इन शहीदों में मंदिर जाने वाले भी हैं, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च जाने वाले भी। यही भारत की वास्तविक पहचान है।
उन्होंने कहा कि जो लोग देश को धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर बांटने का सपना देखते हैं, उन्हें कारगिल वॉर मेमोरियल की इन दीवारों को देखना चाहिए। यह स्मारक बताता है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में है तथा सैनिकों के लिए राष्ट्र सर्वोपरि होता है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध केवल भारत की सैन्य जीत नहीं थी, बल्कि यह देश की कूटनीतिक सफलता का भी महत्वपूर्ण उदाहरण था। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, वीरता और पराक्रम को देखा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विषम मौसम के बावजूद भारतीय सेना ने असाधारण शौर्य का परिचय देते हुए दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि कारगिल के वीरों ने ऐसा इतिहास रचा, जिस पर हर भारतीय को गर्व है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा और राष्ट्र उनकी वीरगाथाओं को कभी नहीं भूलेगा।
रक्षा मंत्री शनिवार को द्रास पहुंचे थे, जहां उन्होंने कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय समारोह के तहत 'शौर्य संध्या' कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस दौरान सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी देश के सामने सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। पाकिस्तान समर्थित घुसपैठ और प्रॉक्सी वॉर की रणनीति अभी समाप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, "घुसपैठियों की नीयत नहीं बदली है। वे अब भी प्रॉक्सी वॉर और घुसपैठ जैसे हथकंडे अपनाते हैं। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि भारतीय सेना हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।"
इससे पहले रक्षा मंत्री ने द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल पहुंचकर 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शहीदों के सम्मान में मौन रखकर उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
कारगिल विजय दिवस हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन विजय' के तहत कारगिल की दुर्गम चोटियों से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर तिरंगा फहराया था। इस विजय ने न केवल भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम को दुनिया के सामने स्थापित किया, बल्कि देश की एकता, संकल्प और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी संदेश दिया। इस अवसर पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके बलिदान को याद किया गया।