नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले तीन हफ्तों से चल रहा विरोध प्रदर्शन शनिवार सुबह बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण घटनाक्रम में बदल गया। पेपर लीक मामले की जांच और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने सुबह जबरन धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया। इस पुलिस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर भारी हंगामा हुआ और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने मोर्चा संभालते हुए खुद भूख हड़ताल शुरू कर दी, जिसके बाद उन पर एक महिला द्वारा स्याही फेंकने का मामला भी सामने आया है।
शनिवार सुबह करीब 7 बजे जंतर-मंतर पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दिल्ली पुलिस के जवान सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में अचानक प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे:
घेराबंदी और कार्रवाई: पुलिस कर्मियों ने सोनम वांगचुक के बिस्तर को चारों तरफ से घेर लिया और उन्हें एक सफेद चादर में उठाकर वहां खड़ी एम्बुलेंस तक ले गए।
प्रदर्शनकारियों का तीखा विरोध: इस अचानक हुई कार्रवाई का वहां मौजूद प्रदर्शनकारियों और समर्थकों ने कड़ा विरोध किया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई, जिससे पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र में हंगामा खड़ा हो गया। पुलिस ने बताया कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और वांगचुक की गिरती सेहत के मद्देनजर डॉक्टरों की सलाह पर अनिवार्य चिकित्सा देखभाल के लिए उठाया गया है।
सोनम वांगचुक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
खतरनाक स्तर पर पहुंची तबीयत: लगातार 21 दिनों के अनशन के कारण वांगचुक का शरीर बेहद कमजोर हो चुका है और उनका वजन 9.5 किलोग्राम तक कम हो गया है।
अदालत का दखल: इससे पहले उनकी बिगड़ती स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को ही केंद्र और दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश दिए थे कि वांगचुक का रोजाना नियमित रूप से मेडिकल चेकअप किया जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत उचित इलाज मुहैया कराया जाए।
सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के तुरंत बाद आंदोलन को जारी रखने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके खुद भूख हड़ताल पर बैठ गए। लेकिन दोपहर होते-होते प्रदर्शन स्थल पर एक और बड़ा विवाद जुड़ गया:
स्याही से हमला: जब दीपके मंच से नीचे आकर बैठे हुए थे, तभी अचानक भीड़ में से आई एक अज्ञात महिला ने उन पर नीली स्याही फेंक दी।
अफरा-तफरी का माहौल: स्याही फेंकने की इस घटना से कार्यक्रम में कुछ देर के लिए व्यवधान आया और समर्थकों के बीच भारी गहमागहमी शुरू हो गई। हालांकि, स्याही फेंकने वाली महिला की पहचान और उसके इस कदम के पीछे की वजह का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है।
सोनम वांगचुक भले ही अस्पताल में हैं, लेकिन जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन छात्र नेता— नेहा, आमीन और मनीष अभी भी अपनी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। पिछले 21 दिनों से भूखे रहने के कारण इन तीनों की शारीरिक स्थिति भी बेहद नाजुक बनी हुई है:
नेहा की स्थिति गंभीर: अनशनकारियों में शामिल नेहा को गंभीर 'हाइपोग्लाइसीमिया' होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सख्त सलाह दी है। इसके अलावा आमीन और मनीष का स्वास्थ्य भी तेजी से गिर रहा है।
क्या होता है हाइपोग्लाइसीमिया? यह शरीर की वह चिकित्सीय स्थिति है जब खून में ग्लूकोज (शुगर लेवल) का स्तर सामान्य सीमा से बहुत नीचे चला जाता है। चिकित्सकीय मानकों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल 70mg/dL से कम हो जाता है, तो उसे हाइपोग्लाइसीमिया माना जाता है, जो अंगों के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।