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समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स पर सुप्रीम कोर्ट का हंटर: कोर्ट की अवमानना पर ₹3 लाख का जुर्माना

दिल्ली: मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और यूट्यूबर समय रैना (Samay Raina) सहित कुल पांच कॉमेडियन्स पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कड़ा रुख अपनाते हुए 3-3 लाख रुपए का भारी जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह कार्रवाई दिव्यांगजनों (विशेष रूप से सक्षम लोगों) का मजाक उड़ाने और पूर्व में दिए गए अदालती आदेशों व आश्वासनों का खुलेआम उल्लंघन करने पर की है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की विशेष पीठ ने की। मामले पर सुनवाई के दौरान पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि समय रैना ने देश की सर्वोच्च अदालत को 'गुमराह' किया और अदालती निर्देशों का गंभीर रूप से माखौल उड़ाया है।

 

क्यों लगा जुर्माना? 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' की याचिका पर बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' (Cure SMA India Foundation) नामक संस्था की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

  • क्या था आरोप: याचिका में आरोप लगाया गया था कि समय रैना के शो पर स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy - SMA) जैसी दुर्लभ बीमारी के इलाज पर बेहद असंवेदनशील और अभद्र टिप्पणियां की गईं और दिव्यांग बच्चों व उनके परिवारों का मजाक उड़ाया गया।

  • पिछला आदेश और उल्लंघन: नवंबर 2025 में कोर्ट ने रैना और अन्य कॉमेडियन्स को निर्देश दिया था कि वे दिव्यांगों के इलाज के लिए फंड जुटाने हेतु हर महीने न्यूनतम 2 शो करेंगे और उनमें विशेष रूप से सक्षम लोगों को भी शामिल करेंगे।

  • फर्जीवाड़ा पकड़ाया: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना ने शो में आमंत्रित करने के लिए कभी भी उनके संगठन या किसी अन्य दिव्यांगजन से संपर्क तक नहीं किया। इसके बाद अदालत ने पाया कि रैना ने अनुपालन (Compliance) को लेकर अदालत में गलत दावे किए। इस पर न्यायालय ने उनके आचरण को आड़े हाथों लेते हुए 15 दिन के भीतर ₹3 लाख जुर्माना जमा करने के सख्त आदेश जारी किए।

 

किन-किन पर चला कोर्ट का चाबुक?

अदालत ने सिर्फ समय रैना ही नहीं, बल्कि उनके साथ पूर्व में रहे चार अन्य कलाकारों—विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घै, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर पर भी आदेशों की अवमानना के लिए प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। इसके साथ ही रणवीर अलाहाबादिया (Ranveer Allahbadia) और आशीष चंचलानी को भी इस मामले में अदालत की तीखी फटकार और जांच का सामना करना पड़ा है।

सुनवाई के दौरान जब वकीलों ने कॉमेडियन्स के विदेशों में शो करने और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का तर्क दिया, तो चीफ जस्टिस ने दोटूक शब्दों में कहा, "इन्हें अब भुगतने दें । अगर यह अहंकार नहीं है, तो हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ही बदलनी पड़ेगी।"

 

क्या है विवाद की जड़? फरवरी 2025 में रणवीर के कमेंट से मचा था बवाल

इस पूरे विवाद की शुरुआत समय रैना के यूट्यूब शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' (India's Got Latent) के पहले सीजन के दौरान हुई थी।

  • विवादित प्रकरण: फरवरी 2025 में प्रसारित एक एपिसोड में प्रसिद्ध यूट्यूबर रणवीर अलाहाबादिया इस शो में बतौर गेस्ट जज शामिल हुए थे। शो के दौरान उन्होंने एक प्रतियोगी से उसके माता-पिता के निजी/यौन संबंधों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और शालीनता की सीमाएं लांघने वाला सवाल पूछा।

  • देशव्यापी विरोध: इस क्लिप के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश के कई राज्यों, जिनमें राजस्थान (जयपुर), महाराष्ट्र और असम शामिल हैं, में शो के प्रमोटरों, समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया और अन्य पैनलिस्टों के खिलाफ अश्लीलता फैलाने और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थीं।

 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: 'अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं, खुद को ओवरस्मार्ट न समझें युवा'

अदालत ने इस मामले की पूर्व सुनवाइयों के दौरान सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया था कि संविधान द्वारा दी गई 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (Freedom of Speech) असीमित या निरंकुश नहीं है।

पीठ ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि व्यावसायिक लाभ और लोकप्रियता हासिल करने के लिए सार्वजनिक मंचों पर अभद्रता परोसना अस्वीकार्य है। कोर्ट ने कहा कि आजकल की पीढ़ी के कुछ युवा खुद को "हद से ज्यादा ओवरस्मार्ट" समझते हैं और वे यह भूल जाते हैं कि सार्वजनिक मंच पर शालीनता और सामाजिक जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है।

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