चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कॉमेडियन्स द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की:
जागरूकता व फंड जुटाने के प्रयास: पीठ ने कहा कि इन पांचों की ओर से दिव्यांग लोगों के लिए जागरूकता फैलाने और फंड जुटाने के प्रयास सराहनीय हैं।
प्रतिभा की सराहना: अदालत ने चेस (शतरंज) टूर्नामेंट आयोजित करने और सहायता कार्यक्रमों पर टिप्पणी करते हुए कहा, "ये बहुत प्रतिभाशाली युवा हैं। अगर इन्होंने अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाई है, तो इसके अच्छे नतीजे सामने आएंगे।"
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जिन पांचों कॉमेडियन्स के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले समाप्त हो गए हैं, उनमें शामिल हैं:
समय रैना
विपुल गोयल
बलराज परमजीत सिंह घई
सोनाली ठक्कर
निशांत जगदीश तंवर
यह पूरा विवाद समय रैना के शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' के एक एपिसोड से शुरू हुआ था:
आपत्तिजनक टिप्पणियों का आरोप: शो के दौरान दिव्यांग व्यक्तियों और 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी' (SMA) जैसी गंभीर बीमारी का सामना कर रहे मरीजों को लेकर कथित रूप से असंवेदनशील मजाक और टिप्पणियां की गई थीं, जिसके बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया और एफआईआर दर्ज कराई गईं।
क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन की याचिका: संस्था 'क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन' ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि इस तरह की टिप्पणियां दिव्यांगों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाती हैं।
भले ही शीर्ष अदालत ने कॉमेडियन्स के खिलाफ दर्ज केस रद्द कर दिए हैं, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गरिमा बनाए रखने के व्यापक मुद्दे पर अदालत सुनवाई जारी रखेगी:
दिशा-निर्देश बनाने पर मंथन: सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि डिजिटल/ऑनलाइन और एंटरटेनमेंट कंटेंट में दिव्यांगजनों के सम्मान, गरिमा और अधिकारों की सुरक्षा के लिए क्या नियम और गाइडलाइंस बनाए जा सकते हैं।