वृंदावन/मथुरा: कान्हा की नगरी वृंदावन में शुक्रवार को हुआ बड़ा नाव हादसा अब मातम में बदल चुका है। शनिवार को दूसरे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अब तक इस हादसे में 11 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 22 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। नदी में अब भी 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में सेना और एनडीआरएफ की टीमें जुटी हुई हैं।
हादसे के दूसरे दिन आर्मी समेत करीब 250 लोगों की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी हुई है।
शव बरामद: शनिवार को देवरहा बाबा घाट के पास से एक और शव बरामद किया गया, जिसे देख परिजनों का कलेजा फट पड़ा।
चुनौतियां: रेस्क्यू अफसरों का कहना है कि यमुना का बहाव तेज होने के कारण शव दूर बहकर जा सकते हैं। साथ ही नदी की तली में भारी गाद (कीचड़) और रेत होने के कारण शवों के दबने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, 24 घंटे बीतने के बाद शव फूलकर पानी की सतह पर आ सकते हैं।
यह हादसा शुक्रवार दोपहर 3 बजे केसी घाट के पास हुआ। मृतकों में सबसे ज्यादा नुकसान एक ही परिवार को हुआ है।
मातम: मरने वालों में एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं, जिनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा जैसे रिश्ते थे।
क्षमता और लापरवाही: 37 श्रद्धालुओं से भरी यह नाव क्षमता के करीब थी, लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि नाविक ने किसी भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट नहीं दी थी। जिस जगह नाव पलटी, वहां पानी करीब 25 फीट गहरा है।
हादसे के बाद नाविक पप्पू निषाद मौके से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने 6 घंटे बाद रात 9 बजे हिरासत में ले लिया।
प्रारंभिक जांच: जांच में सामने आया है कि नाव पप्पू की अपनी थी और उसने श्रद्धालुओं को जुगल घाट से बैठाया था।
मददगार: जब नाव पलटी, तो पास ही पांटून पुल की रिपेयरिंग कर रहे मजदूरों और अन्य नाविकों ने तुरंत कूदकर कई लोगों की जान बचाई, वरना मौतों का आंकड़ा और बढ़ सकता था।
हादसे से जुड़े दो हृदयविदारक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं।
पहला वीडियो: नाव डूबने से ठीक 15 मिनट पहले का है, जिसमें श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे 'राधे-राधे' का जाप कर रहे हैं।
दूसरा वीडियो: यह वीडियो हादसे के वक्त का है, जिसमें श्रद्धालु अचानक पानी में डूबते और जान बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।