पं. रामनारायण आचार्य के अनुसार 14 सितंबर को तृतीया तिथि सुबह 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी, जो 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के नियम के अनुसार हरतालिका तीज 14 सितंबर को ही मनाई जाएगी।
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश के जन्म का समय दोपहर माना जाता है। इस वर्ष 14 सितंबर को दोपहर के समय चतुर्थी तिथि होने के कारण गणेश उत्सव की शुरुआत भी इसी दिन होगी। अगले दिन यानी 15 सितंबर को उदयकाल में चतुर्थी रहेगी, लेकिन दोपहर तक पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इसी वजह से गणेश चतुर्थी की पूजा और स्थापना 14 सितंबर को करना उचित माना जा रहा है।
इससे पहले 2023, 2011 और 2004 में भी हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ने का ऐसा संयोग बना था। वर्ष 2023 में तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी और कई लोगों ने चतुर्थी को 18 और 19 सितंबर दोनों दिन माना था।
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। पूजा के दौरान गणेशजी को स्थापित करने के बाद उनके दाईं ओर तांबे या चांदी के कलश में जल भरकर रखना शुभ माना गया है। कलश के नीचे अक्षत रखें और उस पर मोती बांधने की परंपरा बताई गई है। गणपति के बाईं ओर चावल के ऊपर घी का दीपक जलाने का भी विधान बताया गया है।
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है—
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।“